Vande Bharat: लेंसकार्ट विवाद.. जमकर बरसे धीरेंद्र शास्त्री! ड्रेसकोड को लेकर देशभर में बवाल, क्या ‘यूनिफॉर्मिटी’ के नाम पर धार्मिक पहचान को मिटाने की हो रही कोशिश?

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Lenskart Dress Code Controversy: बागेश्वर धाम के पं धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि, जिनको तिलक-चंदन से परहेज है वो लाहौर जाएं।

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  • Publish Date - April 23, 2026 / 12:18 AM IST,
    Updated On - April 23, 2026 / 12:19 AM IST

Lenskart Dress Code Controversy|| Symbolic Image (Canva)

HIGHLIGHTS
  • लेंसकार्ट के एक कथित आदेश ने देश भर में विवाद की ऐसी आग सुलगा दी है।
  • बागेश्वर धाम के पं धीरेंद्र शास्त्री का बयान भी इस मामले में सामने आया है।
  • उन्होंने कहा - जिनको तिलक-चंदन से परहेज है वो लाहौर जाएं।

Lenskart Dress Code Controversy: नई दिल्ली: प्रोफेशनलिज्म की आड़ में सनातन का अपमान? या फिर कॉर्पोरेट कल्चर के नाम पर भारतीय परंपराओं से परहेज? लेंसकार्ट के एक कथित आदेश ने देश भर में विवाद की ऐसी आग सुलगाई, जिसने शोरूम से लेकर सोशल मीडिया तक को अपनी चपेट में ले लिया। विवाद की जड़ थी कंपनी की वो ‘स्टाइल गाइडलाइन’, जिसमें कर्मचारियों को माथे पर तिलक, बिंदी और हाथों में कलावा पहनने से साफ मना किया गया था। बागेश्वर धाम के पं धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि, जिनको तिलक-चंदन से परहेज है वो लाहौर जाएं, इनका बहिष्कार होना चाहिए।

सिर्फ बागेश्वर बाबा ही नहीं, उज्जैन में साध्वी हर्षा रिछारिया ने भी मोर्चा खोल दिया। (Lenskart Dress Code Controversy) उन्होंने दो टूक कहा कि, भारत से पैसा और इज्जत कमाने वाले लोग अगर सनातन का अपमान करेंगे, तो उन्हें देश छोड़ देना चाहिए।

Lenskart Dress Code Controversy: इधर, पूरे विवाद पर राजनीति भी गरमा गई है। कांग्रेस भाजपा एक बार फिर आमने सामने है विरोध इतना बढ़ा कि कई शहरों में हिंदू संगठनों के कार्यकर्ता लेंसकार्ट के शोरूम में जा घुसे और वहां कर्मचारियों को तिलक लगाकर अपना विरोध दर्ज कराया। जब चौतरफा घिरी कंपनी को व्यापार डूबता नजर आया और ब्रांड की साख दांव पर लगी, (Lenskart Dress Code Controversy) तब जाकर मैनेजमेंट की नींद टूटी। कंपनी के सीईओ पीयूष बंसल ने पुरानी नीति का हवाला देकर माफी मांगी। 18 अप्रैल को जारी नए बयान में कंपनी ने स्पष्ट किया कि अब स्टोर के भीतर बिंदी, तिलक, सिंदूर, कलावा, मंगलसूत्र, कड़ा, हिजाब और पगड़ी जैसे सभी धार्मिक और सांस्कृतिक प्रतीकों का सम्मान और स्वागत है।

देर आए दुरुस्त आए, लेकिन इस विवाद ने एक बड़ी बहस छेड़ दी है। क्या कॉर्पोरेट वर्ल्ड को भारतीय मूल्यों और आस्थाओं की समझ नहीं है? (Lenskart Dress Code Controversy) या फिर ‘यूनिफॉर्मिटी’ के नाम पर धार्मिक पहचान को मिटाने की कोशिश की गई? फिलहाल, लेंसकार्ट बैकफुट पर है और उसने अपनी नई पॉलिसी सार्वजनिक कर दी है।

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