नयी दिल्ली, छह फरवरी (भाषा) लोकसभा में पूर्व सेना प्रमुख एम एम नरवणे के अप्रकाशित संस्मरण से जुड़े विषय तथा कुछ अन्य मुद्दों को लेकर शुक्रवार को भी गतिरोध बरकरार रहा और विपक्षी सदस्यों के हंगामे के कारण सदन की बैठक एक बार के स्थगन के बाद सोमवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।
सदन में सोमवार से गतिरोध की स्थिति बनी हुई है और कांग्रेस समेत विपक्ष के सदस्य राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को पूर्व सेना प्रमुख नरवणे के एक अप्रकाशित संस्मरण का हवाला देते हुए चीन से टकराव का मुद्दा उठाने की अनुमति नहीं मिलने, विपक्ष के आठ सदस्यों को आसन की अवमानना के मामले में निलंबित करने समेत विभिन्न मुद्दों पर हंगामा कर रहे हैं।
बृहस्पतिवार को, राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जवाब के बिना पारित कर दिया गया था।
लोकसभा की कार्यवाही शुक्रवार को जब एक बार के स्थगन के बाद शुरू हुई तो स्थिति ज्यों की त्यों बनी रही। विपक्षी सदस्यों ने आसन के समीप पहुंचकर ‘तानाशाही नहीं चलेगी’ और ‘जो उचित समझो, वो करो’ (नरवड़े के संस्मरण का एक वाक्य) के नारे लगाए।
पीठासीन सभापति कृष्णा प्रसाद तेन्नेटी ने विपक्षी सदस्यों से सदन चलने देने और केंद्रीय बजट पर चर्चा में भाग लेने की अपील की।
उन्होंने कहा, ‘‘आज बजट पर चर्चा है, आप उसमें अपने विषय उठा सकते हैं। कृपया सदन चलने दें।’’
तेन्नेटी ने सदन में तख्तियां लहरा रहे कई विपक्षी सदस्यों को टोकते हुए कहा कि यह उचित नहीं है और सदन में तख्तियां नहीं लाई जा सकतीं।
नारेबाजी जारी रहने पर उन्होंने दोपहर 12 बजकर सात मिनट पर सदन की बैठक सोमवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी।
इससे पहले, शुक्रवार सुबह 11 बजे जब सदन की बैठक शुरू हुई तो लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने प्रश्नकाल शुरू कराया और भारतीय जनता पार्टी के सांसद राजपाल सिंह का नाम पूरक प्रश्न पूछने के लिए पुकारा।
इस दौरान कांग्रेस समेत विपक्षी दलों के सदस्य नारेबाजी करते हुए आसन के समीप आ गए।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि प्रश्नकाल सभी सदस्यों का समय होता है और आज कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी का प्रश्न भी सूचीबद्ध है।
उन्होंने कहा कि हंगामे के कारण इस सत्र में अभी तक सदन का 19 घंटे 13 मिनट का समय बर्बाद हो चुका है।
बिरला ने हंगामा कर रहे सदस्यों से कहा, ‘‘140 करोड़ जनता की आपसे अपेक्षा रहती है कि सदन चले, यहां चर्चा और संवाद हो। अगर आप नियोजित तरीके से गतिरोध पैदा करने चाहते हैं, सदन की मर्यादाओं को समाप्त करना चाहते हैं तो ऐसा सदन मैं नहीं चला सकता।’’
उन्होंने कुछ मिनट के अंदर ही कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दी।
भाषा हक वैभव
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