लोकपाल ने द्रमुक सासंद और तृणमूल के बागी सांसद के विरुद्ध भ्रष्टाचार की शिकायतों का निपटारा किया

लोकपाल ने द्रमुक सासंद और तृणमूल के बागी सांसद के विरुद्ध भ्रष्टाचार की शिकायतों का निपटारा किया

लोकपाल ने द्रमुक सासंद और तृणमूल के बागी सांसद के विरुद्ध भ्रष्टाचार की शिकायतों का निपटारा किया
Modified Date: September 17, 2026 / 04:39 pm IST
Published Date: September 17, 2026 4:39 pm IST

(फाइल फोटो के साथ)

(अश्विनी श्रीवास्तव)

नयी दिल्ली, 17 सितंबर (भाषा) भ्रष्टाचार-रोधी संस्था लोकपाल ने तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी के विरुद्ध बगावत करने वाले पार्टी के एक सांसद तथा द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के एक सांसद के खिलाफ भ्रष्टाचार की शिकायतों का निपटारा करते हुए कहा कि इन आरोपों में ‘दम नहीं है।’

बागी तृणमूल नेता अरूप चक्रवर्ती ने लोकपाल के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए अपने ऊपर लगे आरोपों को ‘‘परेशान करने वाला और बेबुनियाद’’ बताया, जबकि द्रमुक सांसद कलानिधि वीरस्वामी ने कहा कि फ़ैसला ‘खुद सब कुछ बयां करता है’। वीरस्वामी ने इस पर और टिप्पणी करने से इनकार कर दिया क्योंकि मामला अभी अदालत के समक्ष विचाराधीन है।

अरूप चक्रवर्ती ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘आरोप परेशान करने वाले और बेबुनियाद थे। लोकपाल के आदेश ने यह बात बिल्कुल साफ़ कर दी है।’’

बांकुरा से लोकसभा सदस्य अरूप चक्रवर्ती उन 20 तृणमूल सांसदों में एक हैं जिन्होंने अपनी पार्टी के खिलाफ बगावत की और नेशनलिस्ट सिटिज़न पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) में शामिल हो गए थे। एनसीपीआई पंजीकृत लेकिन गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक पार्टी है।

ऐसा मई में पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी के सत्ता में आने के बाद कुछ दिन बाद हुआ था।

‘पीटीआई-भाषा’ ने जब वीरस्वामी से संपर्क किया तो उन्होंने कहा, ‘‘आदेश अपने आप में सब कुछ साफ करता है। मद्रास उच्च न्यायालय के समक्ष एक मामला लंबित है, जिससे यह मामला अदालत के समक्ष विचाराधीन हो जाता है।’’

अरूप चक्रवर्ती के खिलाफ शिकायत पर सुनवाई करते हुए लोकपाल ने कहा कि सीबीआई की आरंभिक जांच में उन पर लगे आरोप साबित नहीं हो सके।

लोकपाल ने पिछले साल नवंबर में सीबीआई को चक्रवर्ती के खिलाफ आरोपों की शुरुआती जांच करने का निर्देश दिया था।

जांच अधिकारी ने 28 अगस्त की अपनी रिपोर्ट में, 45 से ज़्यादा दस्तावेज़ों की जांच और छह गवाहों के बयान एवं आरपीएस की टिप्पणियों के आधार पर भ्रष्टाचार के छह आरोपों का ब्योरा दिया।

आदेश में कहा गया है कि मुख्य आरोप यह था कि अरूप चक्रवर्ती अपने भाई आशीष चक्रवर्ती के ज़रिए गैर-कानूनी गतिविधियां चलाते थे। आरोप है कि आशीष स्थानीय अधिकारियों की मदद से भ्रष्ट काम करने, गैर-कानूनी कमाई इकट्ठा करने और स्थानीय निवासियों पर दबाव डालने का काम करते थे।

अन्य आरोपों में सरकारी मछली पालन परियोजना का गैर-कानूनी तरीके से हस्तांतरण और 2016 से अपने निर्वाचन क्षेत्र में ‘तारापुर झील’ से हर महीने 50 लाख रुपये की गैर-कानूनी कमाई शामिल थी।

दस सितंबर के आदेश में कहा गया, “शुरुआती जांच रिपोर्ट में, जांच अधिकारी ने जांच के दौरान इकट्ठा की गई ज़रूरी चीज़ों और सबूतों का बारीकी से विश्लेषण किया तथा फिर यह राय दी कि सभी छह आरोप साबित नहीं हो सके।”

इसमें यह भी कहा गया कि आगे किसी कार्रवाई की ज़रूरत नहीं है, खासकर इसलिए क्योंकि जिन गतिविधियों का आरोप है, वे तब हुई थीं जब आरपीएस विधायक थे, न कि सांसद; इस वजह से यह मामला लोकपाल अधिनियम की धारा 14 के दायरे से बाहर हो जाता है, जो इसके अधिकार क्षेत्र को तय करती है।

लोकपाल अध्यक्ष जस्टिस ए.एम. खानविलकर की अध्यक्षता वाली छह सदस्यीय पीठ के आदेश में कहा गया, ‘‘इसलिए, इस शिकायत को उसमें कोई दम न होने के कारण खारिज किया जाता है।’’

एक अलग आदेश में, लोकपाल ने चेन्नई उत्तर से द्रमुक सांसद वीरस्वामी के ख़िलाफ़ एक शिकायत का निपटारा किया।

दस सितंबर, 2025 को एक शिकायत दर्ज कर आरोप लगाया गया था कि द्रमुक सांसद ने धोखाधड़ी, डराने-धमकाने और अपने प्रभाव का गलत इस्तेमाल किया।

इसमें यह भी दावा किया गया कि उन्होंने शिकायतकर्ता को चेन्नई के एक शॉपिंग मॉल में 1.70 करोड़ रुपये के निवेश के बदले 38 लाख रुपये लेने के लिए मजबूर किया।

दस नवंबर, 2025 को सीबीआई जांच के आदेश के बाद जांच अधिकारी ने 19 अगस्त को अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपी और कहा कि शिकायतकर्ता द्वारा स्थानीय पुलिस को मामले की सूचना देने के बाद हुई घटनाओं से द्रमुक सांसद की संलिप्तता का कोई सबूत नहीं मिला।

सीबीआई जांच में नौ गवाहों की गवाही ली गयी तथा 32 दस्तावेजों का विश्लेषण किया गया।

लोकपाल ने कहा, “हमारी राय में, जांच अधिकारी का यह निष्कर्ष कि शिकायत में आरपीएस पर लगाए गए आरोप साबित नहीं हुए हैं, उसमें किसी दखल की ज़रूरत नहीं है। हम इससे सहमत हैं। ..”

भाषा राजकुमार नरेश

नरेश


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