महुआ मोइत्रा मामले में सीबीआई को मंजूरी पर विचार के लिये लोकपाल ने समय बढ़ाने की मांग की

महुआ मोइत्रा मामले में सीबीआई को मंजूरी पर विचार के लिये लोकपाल ने समय बढ़ाने की मांग की

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  • Publish Date - January 19, 2026 / 03:22 PM IST,
    Updated On - January 19, 2026 / 03:22 PM IST

नयी दिल्ली, 19 जनवरी (भाषा) लोकपाल ने सोमवार को दिल्ली उच्च न्यायालय से अनुरोध किया कि ‘‘पैसे लेकर सवाल पूछने’’ से संबंधित कथित घोटाले में तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल करने की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को अनुमति देने के मुद्दे पर उसे कानून के अनुसार विचार करने के लिए दी गई समय-सीमा बढ़ायी जाए।

न्यायमूर्ति विवेक चौधरी और न्यायमूर्ति रेणु भटनागर की पीठ ने निर्देश दिया कि आदेश के अनुपालन के लिए और दो महीने देने के अनुरोध वाली लोकपाल की याचिका को 23 जनवरी को उसी पीठ के सामने सूचीबद्ध किया जाए, जिसने यह आदेश दिया था।

लोकपाल के वकील ने बताया कि यह याचिका आरोपपत्र दाखिल करने की अनुमति देने के मुद्दे पर विचार करने के लिए समय सीमा बढ़ाने का अनुरोध करती है।

अदालत ने कहा, ‘‘यह आदेश में संशोधन के समान है। इसे उपयुक्त पीठ के सामने सूचीबद्ध किया जाए।’’

उच्च न्यायालय ने लोकपाल के नवंबर के उस आदेश को 19 दिसंबर, 2025 को रद्द कर दिया था, जिसमें महुआ मोइत्रा के खिलाफ सीबीआई को आरोपपत्र दाखिल करने की अनुमति दी गई थी। अदालत ने लोकपाल से कहा था कि वह लोकपाल अधिनियम की धारा 20 के तहत, प्रावधानों के अनुसार सख्ती से, एक महीने की अवधि के भीतर मंज़ूरी के मुद्दे पर पुनर्विचार करे।

न्यायमूर्ति अनिल क्षेत्रपाल और न्यायमूर्ति हरीश वैद्यनाथन शंकर की पीठ ने अपने 44 पृष्ठों के आदेश में कहा था, लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम के तहत निर्धारित प्रक्रिया से ‘‘स्पष्ट विचलन’’ हुआ है, और लोकपाल ने अधिनियम के प्रावधानों को समझने और व्याख्या में गलती की है।

कथित तौर पर पैसे लेकर सवाल पूछने का यह मामला इस आरोप से संबंधित है कि मोइत्रा ने एक व्यवसायी से नकदी और उपहार के बदले सदन में सवाल पूछे थे।

फैसला महुआ मोइत्रा की उस याचिका पर आया था, जिसमें उन्होंने लोकपाल के 12 नवंबर, 2025 के आदेश को चुनौती दी थी। उस आदेश में ‘‘पैसे लेकर सवाल पूछने’’ संबंधी कथित घोटाले में उनके खिलाफ आरोपपत्र दाखिल करने की सीबीआई को अनुमति दी गई थी।

सीबीआई ने मोइत्रा और व्यवसायी दर्शन हीरानंदानी से जुड़े कथित तौर पर पैसे लेकर सवाल पूछने के मामले में लोकपाल को अपनी रिपोर्ट जुलाई 2025 में सौंपी थी।

केंद्रीय एजेंसी ने लोकपाल के अनुरोध पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के प्रावधानों के तहत दोनों के खिलाफ 21 मार्च, 2024 को एक प्राथमिकी दर्ज की थी।

यह आरोप लगाया गया था कि मोइत्रा ने हीरानंदानी से रिश्वत और अन्य अनुचित लाभ लेकर भ्रष्ट आचरण किया।

भाषा अमित दिलीप

दिलीप