वो दौर जब देश विदेशी ताकतों की जंजीरों में जकड़ा हुआ था, आजादी के लिए छटपटाहट पूरे देश में थी. उस घने अंधेरे में प्रकाश की एक उम्मीद के रुप में इलाहबाद के छोटे से गांव में एक महान व्यक्ति ने जन्म लिया, जिन्होंने राष्ट्रभाषा के प्रबल ज्ञान और अपनी नैतिकता से दुनिया के सबसे बड़े साम्रज्य को चुनौती दी, वो व्यक्ति थे महामना मदन मोहन मालवीय जी।आज मालवीय जी का जन्म दिन है हम आज देखेंगे की उनके क्या ऐसे योगदान है जो हमें सदियों तक उनकी याद दिलाते रहेंगे।
Remembering Pandit Madan Mohan Malaviya on his Jayanti. His impact on India’s history is strong and unforgettable. His efforts to further education and a spirit of patriotism will always be remembered.
— Narendra Modi (@narendramodi) December 25, 2017
काशी हिन्दू विश्वविद्यालय की स्थापना
राष्ट्र प्रेम, राष्ट्र भाषा के प्रबल समर्थक, भारतीय संस्कृति के प्रति अटूट निष्ठा के महान आदर्श पंडित मदन मोहन मालवीय का जन्म 25 दिसंबर 1861को हुआ. वे सदैव उन कोशिशों में लगे रहे जो भारत के निष्ठावान युवाओं की असीमित शक्ति को आधुनिक शिक्षा एवं राष्ट्रीय भाषा के ज्ञान से समृद्ध और सक्षम कर सके। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय की स्थपना इसी महान दूरदर्शी सोच का परिणाम था। मालवीयजी चाहते थे कि देश में इस मानसिकता का, इस संकल्प का, संस्कृति का विकास होना चाहिए कि जहां हम एक स्वावलंबी समाज की रचना कर सकेंगे जिसमें व्यक्ति स्वाभिमानी होगा और समाज स्वावलंबी.
भारतीय उद्योगों को संरक्षण
मालवीय जी ने भारतीय उद्योगों को विनाश से बचाने के लिए मुहिम चलाई और भारतीय उद्योग एक्ट में संशोधन की मांग की.
एक व्यक्ति किरदार कई
राष्ट्रीय मंच पर मालवीय जी जब उदित हुए उस वक्त वे केवल 25 वर्ष के थे. उन्होंने अपने लंबे और यादगार जीवन में कई अहम मंचों पर अपनी नैतिकता का परिचय दिया, वे एक कुशल राजनीतिज्ञ, महान शिक्षाविद,संवेदनशील समाज सुधारक, समर्पित देशभक्त और धर्मपरायण नेता थे उन्होंने अंग्रेज शासन की धज्जियां उड़ाते हुए कहा कि “जो अंग्रेज अपने नैतिक मूल्यों की दुहाई देते हैं उन्हें ये जानकर क्षोभ होगा कि उनकी सरकार हमारे साथ गुलामों जैसा व्यवहार करती है। अंग्रेज सरकार का तो उसूल ही है जन प्रतिनिधित्व नहीं तो कर नहीं”
लोकप्रिय नेता
एक मात्र नेता जो कांग्रेस के 4 बार अध्यक्ष चुने जाने वाले महामना देश के लोकप्रिय नेता थे. गांधी जी ने मालवीय जी से मिलने के बाद कहा था कि “मालवीय जी मुझे गंगा की धारा जैसे निर्मल और पवित्र लगे, मैंने तय किया कि मैं गंगा की उसी निर्मल धारा में गोता लगाऊंगा”. राष्ट्रनेता मालवीय जी के बारे में स्वयं पंडित जवाहरलाल नेहरू ने लिखा है, ‘अपने नेतृत्वकाल में हिन्दू महासभा को राजनीतिक प्रतिक्रियावादिता से मुक्त रखा और अनेक बार धर्मों के सहअस्तित्व में अपनी आस्था को अभिव्यक्त किया. वे भारत के पहले और अन्तिम व्यक्ति थे जिन्हें महामना की सम्मानजनक उपाधि से विभूषित किया गया।
‘भारत रत्न’ से सम्मानित
भारत सरकार ने महामना मदन मोहन मालवीय को 2015 में सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार भारत रत्न से सम्मानित किया. सरकार के इस फैसले पर उनके परिवार वालों ने बेहद खुशी का इज़हार कर मोदी सरकार का शुक्रिया अदा किया.
अर्जुन सिंह, IBC24