मप्र: स्टाम्प बिक्री में 2.7 करोड़ रुपये से अधिक के ‘घोटाले’ में गुना जिला कोषागार अधिकारी निलंबित

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मप्र: स्टाम्प बिक्री में 2.7 करोड़ रुपये से अधिक के 'घोटाले' में गुना जिला कोषागार अधिकारी निलंबित

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  • Publish Date - January 31, 2026 / 11:13 PM IST,
    Updated On - January 31, 2026 / 11:13 PM IST

गुना (मध्यप्रदेश), 31 जनवरी (भाषा) मध्यप्रदेश सरकार ने शासकीय स्टाम्पों की बिक्री में कथित अनियमितताओं के सिलसिले में गुना के जिला कोषागार अधिकारी को शनिवार को निलंबित कर दिया। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी।

अधिकारी ने बताया कि इन कथित अनियमितताओं के चलते तकरीबन 2.70 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ है। उन्होंने बताया कि इस सप्ताह की शुरुआत में इस मामले में एक खजांची के खिलाफ कथित तौर पर राजस्व, न्यायिक, नोटरी और विशेष डाक टिकट जारी करने लेकिन इन लेनदेनों का रिकॉर्ड नहीं रखने के लिए प्राथमिकी दर्ज की गई थी।

अधिकारियों ने बताया कि शुरुआती जांच के दौरान एकीकृत वित्तीय प्रबंधन सूचना प्रणाली (आईएफएमआईएस) और भौतिक रूप से उपलब्ध स्टाम्प स्टॉक के बीच 3 करोड़ 74 लाख रुपये से अधिक का अंतर पाया गया।

उन्होंने बताया कि हालांकि बाद में कुछ चालानों की प्रविष्टियां मिलने के बाद अंतर की राशि 2 करोड़ 70 लाख 25 हजार 310 रुपये निर्धारित की गई। उन्होंने कहा कि इसका हिसाब देने में कोषालय शाखा में पदस्थ अधिकारी पूरी तरह विफल रहे।

उन्होंने बताया कि इसके बाद जिला कोषागार अधिकारी राकेश कुमार ने 21 जनवरी को छावनी पुलिस थाने को एक पत्र लिखकर प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की थी। उन्होंने बताया कि इसके बाद सहायक ग्रेड-3 कैशियर केशव वर्मा के खिलाफ बुधवार को भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता के तहत एक प्राथमिकी दर्ज की गई।

अधिकारियों के मुताबिक वर्मा ने कथित तौर पर 3.74 करोड़ रुपये के स्टाम्प बेचे, लेकिन केवल 1.04 करोड़ रुपये में प्रविष्टियां कीं। उन्होंने कहा कि वित्त विभाग ने कोषागार अधिकारी कुमार को भी लापरवाही के लिए जिम्मेदार ठहराया और उन्हें निलंबित कर दिया।

विभाग ने एक बयान में कहा कि आईएफएमआईएस प्रणाली के तहत स्टाम्प के हस्तांतरण के लिए कोषागार अधिकारी के लॉगिन के साथ ऑनलाइन मंजूरी अनिवार्य है, लेकिन कुमार ने कथित तौर पर प्रक्रिया को नजरअंदाज किया और सिस्टम प्रविष्टियों के बिना स्टाम्प को हटाने की अनुमति दी।

इसमें कहा गया है कि मध्यप्रदेश ट्रेजरी कोड, 2020 के तहत अनिवार्य रजिस्टर और पावती का रखरखाव नहीं किया गया और विक्रेताओं को लिखित आवेदन या रसीदों के बिना स्टाम्प जारी किए गए थे।

कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल ने कहा कि 2017-18 से कोषागार में स्टाम्प से संबंधित रिकॉर्ड नहीं रखे गए थे।

भाषा सं ब्रजेन्द्र अमित

अमित