Eid Kab Hai 2026: भारत में ईद का चांद कब दिखेगा? 20 या 21 मार्च में से किस दिन है ईद? क्यों इस्लाम में हरे रंग को माना जाता है बेहद पवित्र!

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Eid Kab Hai 2026: ईद उल-फितर, जिसे मीठी ईद भी कहा जाता है, मुस्लिम समुदाय का सबसे बड़ा पर्व है। एक महीने के रोजे के बाद, ईद के दिन अल्लाह का आभार व्यक्त किया जाता है। इस्लाम में हरे रंग को पाक माना जाता है, और इस दिन को लेकर भारत में तारीख अभी तय नहीं है।

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  • Publish Date - March 18, 2026 / 03:06 PM IST,
    Updated On - March 18, 2026 / 03:08 PM IST

(Eid Kab Hai 2026/ Image Credit: Meta AI)

HIGHLIGHTS
  • ईद उल-फितर का पर्व चांद के दिखने पर निर्भर करता है।
  • इस्लाम में हरे रंग को पाक माना जाता है, जो जन्नत का प्रतीक है।
  • ईद उल-फितर के दिन मुसलमान नमाज अदा करते हैं और मिठाइयां बनाते हैं।

नई दिल्ली: Eid Ul Fitr 2026 Date: इस समय मुस्लिम समुदाय का पवित्र रमजान का महीना चल कर रहा है, जो इस्लामिक कैलेंडर का नौवां महीना होता है। रमजान के बाद मनाई जाने वाली ईद उल-फितर को मीठी ईद भी कहा जाता है। इस दौरान मुसलमान एक महीने तक रोजा रखते हैं, इबादत करते हैं और आत्मसंयम का पालन करते हैं। ईद के दिन नमाज अदा करते हैं, एक-दूसरे को गले लगाकर ईद मुबारक कहते हैं और घरों में मीठे पकवान जैसे सेवइयां बनाते हैं।

ईद कब मनाया जाएगा?

ईद का पर्व चांद के दिखने पर निर्भर करता है। अगर चांद 19 मार्च को दिखाई दिया तो ईद 20 मार्च को मनाई जाएगी और अगर चांद 20 मार्च को दिखाई देता है, तो ईद 21 मार्च को मनाई जाएगी। चूंकि इस्लामिक कैलेंडर चांद के दिखने पर आधारित है, इसलिए ईद की तारीख हर साल बदलती रहती है। भारत सहित कई देशों में चांद दिखने के बाद ही ईद का ऐलान किया जाता है।

ईद उल-फितर का उत्सव और परंपराएं

ईद उल-फितर के दिन मुसलमान सुबह की नमाज अदा करते हैं, जिसे ईद की नमाज कहा जाता है। इसके बाद, लोग एक-दूसरे को गले लगाकर मुबारकबाद देते हैं और मिठाइयां जैसे सेवइयां बनाते हैं। इस दिन एक खास परंपरा, जकात-उल-फितर (फितरा) भी निभाई जाती है, जिसमें जरूरतमंदों को दान दिया जाता है, ताकि वे भी त्योहार की खुशियों में शामिल हो सकें। यह परंपरा सामाजिक समानता और भाईचारे का संदेश देती है।

ईद उल-फितर का धार्मिक महत्व

पवित्र कुरान के अनुसार, रमजान के दौरान उपवास रखने के बाद, अल्लाह अपने बंदों को बख्शीश देता है और इसे ईद-उल-फितर के रूप में मनाया जाता है। ईद के दिन खुदा का शुक्रिया अदा करते हैं कि उन्होंने पूरे माह उपवास रखने की ताकत दी। इस दिन एक खास रकम (जकात) भी गरीबों और जरूरतमंदों के लिए दी जाती है, जिससे वे भी इस खुशी में शामिल हो सकें।

हरे रंग का इस्लाम में महत्व

इस्लाम में हरे रंग को पाक माना जाता है। हरे रंग को जन्नत की हरियाली और शांति का प्रतीक माना जाता है। पैगंबर मुहम्मद से जुड़ी कई हदीसों (रिवायतों) में हरे रंग के लिबास का उल्लेख मिलता है और माना जाता है कि मुहम्मद साहब को हरा रंग बहुत पसंद था। इसके अलावा, कुरान में भी जन्नत के निवासियों को हरे रेशमी लिबास पहनने का उल्लेख है, जिससे हरे रंग को विशेष धार्मिक महत्व मिला है।

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ईद उल-फितर कब मनाई जाएगी?

ईद उल-फितर का पर्व चांद के दिखने पर निर्भर करता है। अगर चांद 19 मार्च को दिखे तो 20 मार्च को, और अगर चांद 20 मार्च को दिखे तो 21 मार्च को मनाई जाएगी।

ईद उल-फितर का मुख्य उद्देश्य क्या है?

ईद उल-फितर का मुख्य उद्देश्य रमजान के उपवासों के बाद अल्लाह का शुक्रिया अदा करना है और गरीबों को ज़कात देना है।

ईद उल-फितर के दिन कौन सी परंपराएं निभाई जाती हैं?

ईद उल-फितर के दिन मुस्लिम समुदाय नमाज अदा करते हैं, एक-दूसरे को गले लगाकर ईद मुबारक कहते हैं, और सेवइयां व मिठाइयां बनाते हैं।

इस्लाम में हरे रंग का क्या महत्व है?

इस्लाम में हरे रंग को पाक माना जाता है और यह जन्नत की हरियाली और शांति का प्रतीक है।