नयी दिल्ली, 18 मार्च (भाषा) केंद्र सरकार ने देश में तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) की आपूर्ति में कमी तीसरे सप्ताह जारी रहने के बीच पाइप के जरिये आपूर्ति की जाने वाली रसोई गैस (पीएनजी) नेटवर्क के विस्तार को तेज करने वाले राज्यों को वाणिज्यिक एलपीजी की आपूर्ति बढ़ाने का बुधवार को वादा किया। इससे खाना पकाने के ईंधन की उपलब्धता पर दबाव कम किया जा सकेगा।
पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण भारत की करीब 60 प्रतिशत एलपीजी तक पहुंच अवरुद्ध होने से सरकार ने घरेलू रसोई के लिए आपूर्ति को प्राथमिकता दी है। होटल जैसे वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों को शुरू में आपूर्ति बंद कर दी गई थी लेकिन बाद में उनकी जरूरत का पांचवां हिस्सा दिया गया।
केंद्र सरकार ने अब उन राज्यों में वाणिज्यिक एलपीजी आपूर्ति को 30 प्रतिशत तक बढ़ाने की पेशकश की है, जो पीएनजी नेटवर्क के विस्तार को तेज करेंगे। पीएनजी, घरेलू रसोई एवं वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों के लिए एलपीजी का एक आसान विकल्प है।
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय में संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने पत्रकारों को जानकारी देते हुए कहा कि एलपीजी आपूर्ति सीमित है लेकिन घरों व उद्योगों को पीएनजी की आपूर्ति निर्बाध जारी है।
उन्होंने कहा, ‘‘ जहां शहर गैस वितरण (सीजीडी) नेटवर्क पास में उपलब्ध है, वहां एलपीजी उपभोक्ताओं को पीएनजी का कनेक्शन लेना चाहिए।’’
संयुक्त सचिव ने कहा कि उनके मंत्रालय ने राज्यों को पत्र लिखकर 10 प्रतिशत अधिक वाणिज्यिक एलपीजी की पेशकश की है, यदि वे सभी पुराने आवेदनों को स्वीकृत अनुमति प्रदान करते हैं और पाइपलाइन बिछाने के लिए नए आवेदन के 24 घंटे बाद भी यही अनुमति देते हैं, वार्षिक किराये/पट्टे के शुल्क में कटौती करते हैं और खुदाई व पुनर्स्थापन योजनाओं की अनुमति देते हैं।
शर्मा ने कहा, ‘‘ इन सुधारों को आगे बढ़ाने और मंजूरियों में तेजी लाने की जिम्मेदारी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों पर है।’’
एलपीजी आपूर्ति की स्थिति पर उन्होंने कहा कि देश में कहीं भी पूरी तरह आपूर्ति समाप्त नहीं हुई है।
उन्होंने कहा, ‘‘ हालांकि, स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। मुख्य रूप से इसलिए क्योंकि आयात बाधित हो गया है।’’
ऑनलाइन बुकिंग 93 प्रतिशत तक बढ़ गई है लेकिन उपभोक्ता अब भी डीलर के यहां पर कतार में लगे हुए हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘ एलपीजी उपभोक्ताओं से अनुरोध है कि ऑनलाइन बुकिंग करने के बाद प्रतीक्षा करें। सिलेंडर उनके घर पहुंचाए जाएंगे। घबराहट में बुकिंग करने या एलपीजी वितरकों के पास जाने की जरूरत नहीं है।’’
एलपीजी पर दबाव कम करने के लिए सरकार वाणिज्यिक एवं घरेलू एलपीजी उपयोगकर्ताओं को पीएनजी अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। शहर गैस वितरण कंपनियां प्रोत्साहन दे रही हैं और जल्द ‘कनेक्शन’ प्रदान कर रही हैं।
पेट्रोलियम सचिव नीरज मित्तल ने सभी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को बुधवार को पत्र लिखकर कहा कि शहर गैस वितरण कंपनियों ने पाइपलाइन बिछाने और ‘खुदाई व पुनर्स्थापन योजना’ (आरओयू) शुल्क एवं पट्टा शुल्क अधिक होने की शिकायत की है, जिससे निवेश का माहौल प्रभावित हुआ है।
उन्होंने लिखा, ‘‘ यह ज्ञात है कि एक उभरते व्यवसाय पर अत्यधिक कर उस व्यवसाय से जुड़ी अन्य आर्थिक गतिविधियों पर दबाव डाल सकते हैं।’’
मित्तल ने कहा कि प्राकृतिक गैस को स्वच्छ ईंधन के रूप में अपनाने को बढ़ावा देने और सीमित एलपीजी आपूर्ति के विकल्प के रूप में इसके उपयोग को तेज करने के लिए राज्य सरकारों को शुल्क कम करना चाहिए। शहर गैस वितरण कंपनियों द्वारा 12.63 करोड़ घरेलू ‘कनेक्शन’ देने की प्रतिबद्धता के बावजूद अब तक केवल 1.6 करोड़ पीएनजी ‘कनेक्शन’ दिए गए हैं।
उन्होंने लिखा, ‘‘ यदि कारोबार सुगमता एवं लागत संबंधी सुधारों के माध्यम से इस अंतर को पाटा जाए तो आर्थिक गतिविधियों को आसानी से बढ़ावा दिया जा सकता है और एक बड़े बाजार से अधिक राजस्व अर्जित किया जा सकता है।’’
मित्तल ने बताया कि अधिक वाणिज्यिक एलपीजी कोटा पाने के लिए राज्यों को किन सुधारों की जरूरत है। सीजीडी आवेदनों की स्वीकृति एवं शिकायतों के समाधान को समिति गठित करने वाले राज्यों को एलपीजी का एक प्रतिशत अतिरिक्त आवंटन किया जाएगा। पाइपलाइन बिछाने के लिए आवेदन करने के 24 घंटे बाद सभी पुराने आवेदनों व नए आवेदनों को स्वतः सीजीडी अनुमति देने वालों को दो प्रतिशत अतिरिक्त आवंटन दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि यदि राज्य सीजीडी इकाइयों के लिए ‘खुदाई व पुनर्स्थापन योजना’ लागू करते हैं, तो उन्हें एलपीजी की तीन प्रतिशत अतिरिक्त आपूर्ति मिलेगी जिससे वे सड़कों आदि की खुदाई व पुनर्स्थापन स्वयं कर सकेंगे और इस प्रकार पुनर्स्थापन शुल्क समाप्त हो जाएगा।
मित्तल ने कहा कि जो राज्य सीजीडी नेटवर्क बिछाने/संचालन के लिए वार्षिक किराया/पट्टा शुल्क को शून्य कर देते हैं, उन्हें चार प्रतिशत अतिरिक्त वाणिज्यिक एलपीजी प्राप्त होगी।
सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं से माल की आपूर्ति प्रभावित होने के कारण, भारत ने आपूर्ति को सीमित कर दिया है। सरकार ने घरेलू खपत को प्राथमिकता देने एवं खाना पकाने की गैस की तत्काल कमी को रोकने के लिए वाणिज्यिक उपयोगकर्ताओं व उद्योगों को आवंटन में कटौती की है।
एलपीजी पर अत्यधिक निर्भर कई क्षेत्रों में व्यवधान का असर दिखना शुरू हो गया है। रेस्तरांओं ने अपने ‘मेन्यू’ से धीमी आंच पर पकाए जाने वाले व्यंजन हटाना शुरू कर दिया है क्योंकि इनमें खाना पकाने के लिए बड़ी मात्रा में गैस की खपत होती है। वहीं, ईंट व टाइल विनिर्माण, मिट्टी के बर्तन और कांच भट्टों जैसे उद्योगों को भी गैस की कमी के कारण परिचालन जारी रखने में कठिनाई हो रही है।
श्मशान घाट, कपड़े धोने की जगहें और अस्पतालों की रसोई जैसी आवश्यक सेवाएं भी नियमित रूप से काम करने के लिए संघर्ष कर रही हैं। बेकरी, स्ट्रीट फूड विक्रेता तथा सामुदायिक रसोई चलाने वाले एलपीजी की उपलब्धता कम होने के कारण उत्पादन में कटौती कर रहे हैं।
शर्मा ने कहा कि वाणिज्यिक एलपीजी का भंडार राज्यों के पास रखा गया है और उन्हें इसके उपयोग की प्राथमिकता तय करने को कहा गया है। अब तक 15 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने एलपीजी वितरण दिशानिर्देश जारी किए हैं।
इसके अलावा, खाना पकाने व अन्य जरूरतों को पूरा करने के लिए राज्यों को 48,000 किलोलीटर अतिरिक्त मिट्टी का तेल दिया गया है। 12 राज्यों ने इस अतिरिक्त कोटे का उपयोग किया है।
उन्होंने कहा कि पेट्रोल व डीजल के मामले में भारत आत्मनिर्भर है और खुदरा दुकानों पर कहीं भी कमी की सूचना नहीं है।
विमान ईंधन (एटीएफ) के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि इसकी पर्याप्त आपूर्ति उपलब्ध है।
भाषा निहारिका अजय
अजय