Kailashanand Giri On PM Modi : लोकतंत्र में विरोध का अधिकार है, लेकिन गाली का नहीं…’ PM मोदी के संदेश पर महामंडलेश्वर का बड़ा बयान, जताई नाराजगी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के युवाओं के नाम दिए गए संदेश पर निरंजनी अखाड़े के महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरि महाराज ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि लोकतंत्र में विरोध का अधिकार सभी को है, लेकिन किसी भी संवैधानिक पद या उनके परिवार के प्रति अभद्र भाषा का प्रयोग भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा के खिलाफ है।

Kailashanand Giri On PM Modi : लोकतंत्र में विरोध का अधिकार है, लेकिन गाली का नहीं…’ PM मोदी के संदेश पर महामंडलेश्वर का बड़ा बयान, जताई नाराजगी

Kailashanand Giri On PM Modi / Image Source : x

Modified Date: August 1, 2026 / 05:52 pm IST
Published Date: August 1, 2026 5:49 pm IST
HIGHLIGHTS
  • महामंडलेश्वर कैलाशानंद गिरि ने प्रधानमंत्री के संदेश का समर्थन किया।
  • उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विरोध का अधिकार है, लेकिन भाषा की मर्यादा बनाए रखना जरूरी है।
  • प्रधानमंत्री और उनके परिवार के खिलाफ अभद्र भाषा के प्रयोग की उन्होंने निंदा की।

नई दिल्ली : Kailashanand Giri On PM Modi प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के युवाओं के नाम दिए गए संदेश पर निरंजनी अखाड़े के महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरि महाराज का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का संदेश लोकतांत्रिक मूल्यों, संवाद और नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों के सम्मान को दर्शाता है। इसके साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री और उनके परिवार के प्रति अभद्र भाषा के प्रयोग की कड़े शब्दों में निंदा की है।

शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक ढंग से अपनी बात रखने का अधिकार

महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरि महाराज ने कहा कि भारत का संविधान हर नागरिक को शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक ढंग से अपनी बात रखने और विरोध करने का अधिकार देता है। PM Modi Video Message हालांकि, विरोध के नाम पर प्रधानमंत्री जैसे सर्वोच्च संवैधानिक पद पर आसीन व्यक्ति या उनके परिवार के खिलाफ अपमानजनक और अशोभनीय टिप्पणी करना भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा के खिलाफ है।

विचारों का मतभेद होना स्वाभाविक है

उन्होंने स्पष्ट किया कि लोकतंत्र में विचारों का मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन भाषा की गरिमा और शिष्टाचार बनाए रखना हर नागरिक का कर्तव्य है। स्वामी कैलाशानंद गिरि ने ऐसी अमर्यादित भाषा की निंदा करते हुए देश के नागरिकों और विशेषकर युवाओं से अपील की है। उन्होंने कहा कि सभी को अपने लोकतांत्रिक और संवैधानिक अधिकारों का प्रयोग संयम, शालीनता और राष्ट्रहित की भावना के साथ करना चाहिए।

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