Maharashtra Freedom of Religion Act: ‘शादी से पहले मां का जो धर्म था, वही बच्चे का भी धर्म’.. रक्षाबंधन पर लागू होने जा रहा इस राज्य में धर्म स्वतंत्रता कानून, पढ़ें इसके प्रावधान

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महाराष्ट्र में धार्मिक स्वतंत्रता कानून 2026, 28 अगस्त से लागू होगा। कानून में जबरन धर्मांतरण और लालच देकर धर्म परिवर्तन पर सख्त सजा होगी।

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  • Publish Date - August 18, 2026 / 05:21 PM IST,
    Updated On - August 18, 2026 / 05:22 PM IST

Maharashtra Freedom of Religion Act 2026 || Image- IBC24 NEWS Archive

HIGHLIGHTS
  • 28 अगस्त से लागू होगा नया कानून
  • जबरन धर्मांतरण पर सख्त सजा
  • शादी के बहाने धर्मांतरण पर कार्रवाई

मुंबई: महाराष्ट्र सरकार ने महाराष्ट्र फ्रीडम ऑफ रिलिजन एक्ट, 2026 को लागू करने की तारीख तय कर दी है। राज्य के गृह विभाग ने सोमवार को नोटिफिकेशन जारी करते हुए 28 अगस्त 2026 से इस कानून को लागू करने की घोषणा कर दी है। (Maharashtra Freedom of Religion Act 2026) इस ऐलान के साथ ही महाराष्ट्र उन राज्यों की सूची में शामिल हो गया है, जहां धर्मांतरण को नियंत्रित करने के लिए इसी तरह के कानून लागू हैं। इनमें उत्तर प्रदेश, गुजरात, मध्य प्रदेश, कर्नाटक और उत्तराखंड शामिल हैं।

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जबरन या लालच देकर धर्मांतरण पर रोक

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली सरकार ने इस कानून का विधेयक इसी साल मार्च में विधानसभा में पेश किया था। कानून के तहत जबरदस्ती, धोखाधड़ी, प्रलोभन, गलत जानकारी, अनुचित प्रभाव या किसी अन्य कपटपूर्ण तरीके से धर्मांतरण कराना अपराध माना गया है।

शादी के नाम पर धर्मांतरण पर 7 साल तक सजा

कानून के मुताबिक शादी के बहाने अवैध धर्मांतरण कराने पर 7 साल तक की जेल और 1 लाख रुपये तक जुर्माना हो सकता है। (Maharashtra Freedom of Religion Act 2026) वहीं, यदि धर्मांतरण में नाबालिग, मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति, महिला या अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के व्यक्ति को शामिल किया जाता है, तो 7 साल तक की सजा और 5 लाख रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकता है।

सामूहिक धर्मांतरण पर भी कड़ी सजा

सामूहिक धर्मांतरण के मामले में 7 साल तक की जेल और 5 लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है। वहीं, बार-बार अपराध करने वाले व्यक्ति को 10 साल तक की जेल और 5 लाख रुपये तक जुर्माना हो सकता है।

क्या-क्या ‘प्रलोभन’ माना जाएगा?

कानून के तहत किसी व्यक्ति को धर्म बदलने के लिए पैसा, उपहार, नौकरी, मुफ्त शिक्षा, शादी का वादा, बेहतर जीवनशैली या चमत्कारिक इलाज जैसे किसी लाभ का लालच देना अपराध की श्रेणी में आएगा। (Maharashtra Freedom of Religion Act 2026) शादी या शादी के वादे के जरिए धर्मांतरण भी प्रतिबंधित किया गया है, यदि उसमें प्रलोभन, जबरदस्ती या धोखे का इस्तेमाल किया गया हो।

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पुलिस में शिकायत पर FIR का प्रावधान

कानून में यह भी प्रावधान है कि किसी कथित अवैध धर्मांतरण को लेकर कोई व्यक्ति शिकायत करता है तो थाना प्रभारी को शिकायत दर्ज करनी होगी। सरकार ने विधेयक के उद्देश्य में कहा था कि देश के विभिन्न हिस्सों में जबरन और संगठित धर्मांतरण की घटनाओं की शिकायतें सामने आई हैं और कमजोर वर्गों को अक्सर प्रलोभन के जरिए निशाना बनाया जाता है। सरकार के अनुसार, संविधान धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार देता है, लेकिन यह अधिकार लोक व्यवस्था, नैतिकता और स्वास्थ्य से जुड़ी सीमाओं के अधीन है। सरकार का तर्क है कि किसी व्यक्ति को जबरन दूसरे धर्म में परिवर्तित करने का अधिकार संविधान नहीं देता।

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Q1. महाराष्ट्र धार्मिक स्वतंत्रता कानून कब लागू होगा?

महाराष्ट्र सरकार की अधिसूचना के अनुसार कानून 28 अगस्त 2026 से लागू होगा।

Q2. शादी के बहाने धर्मांतरण पर कितनी सजा है?

अवैध धर्मांतरण पर सात साल तक जेल और एक लाख रुपये तक जुर्माना हो सकता है।

Q3. कानून में धर्मांतरण के किन तरीकों पर रोक है?

जबरदस्ती, धोखाधड़ी, लालच, गलत जानकारी, अनुचित प्रभाव और शादी के झूठे वादे पर रोक है।