पत्नी का भरण-पोषण करना पति का प्राथमिक और निरंतर कर्तव्य है : उच्चतम न्यायालय

पत्नी का भरण-पोषण करना पति का प्राथमिक और निरंतर कर्तव्य है : उच्चतम न्यायालय

पत्नी का भरण-पोषण करना पति का प्राथमिक और निरंतर कर्तव्य है : उच्चतम न्यायालय
Modified Date: April 16, 2026 / 10:02 pm IST
Published Date: April 16, 2026 10:02 pm IST

नयी दिल्ली, 16 अप्रैल (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को कहा कि पति का अपनी पत्नी का भरण-पोषण करने का दायित्व एक प्राथमिक और निरंतर कर्तव्य है और इसे इस तरह से निभाया जाना चाहिए जिससे पत्नी गरिमापूर्ण जीवन जी सके।

न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने कहा कि भरण-पोषण निष्पक्ष, उचित और पक्षों की स्थिति तथा पति की वित्तीय क्षमता के अनुरूप होना चाहिए।

पीठ ने कहा, ‘‘पत्नी का भरण-पोषण करना पति का प्राथमिक और निरंतर कर्तव्य है, जिसका निर्वहन इस प्रकार किया जाना चाहिए जिससे पत्नी गरिमापूर्ण जीवन जी सके और विवाह के दौरान प्राप्त जीवन स्तर के अनुरूप जीवन जी सके।’’

उच्चतम न्यायालय ने ये टिप्पणियां एक महिला के गुजारा भत्ता की राशि को 15,000 रुपये प्रतिमाह से बढ़ाकर 25,000 रुपये प्रतिमाह करते हुए कीं।

मामले के अनुसार, महिला का विवाह सात मई, 2023 को नयी दिल्ली में हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार हुआ था।

शादी के बाद महिला अपने ससुराल में प्रतिवादी और उसके परिवार के सदस्यों के साथ रहने लगी। महिला के अनुसार, दोनों पक्षों के बीच संबंध सौहार्दपूर्ण नहीं रहे और ससुराल में रहने के दौरान उसे उपेक्षा और शारीरिक एवं मानसिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ा।

इन परिस्थितियों में, पत्नी ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस), 2023 की धारा 144 के तहत टनकपुर, जिला चंपावत स्थित सक्षम न्यायालय में कार्यवाही शुरू की और 50,000 रुपये प्रति माह के गुजारा भत्ता की मांग की।

चंपावत स्थित पारिवारिक अदालत ने पत्नी को 8,000 रुपये प्रतिमाह का गुजारा भत्ता देने का आदेश दिया था। इस राशि से असंतुष्ट होकर पत्नी ने उत्तराखंड उच्च न्यायालय में अपील की, जिसने इस राशि को बढ़ाकर 15,000 रुपये प्रति माह कर दिया था।

भाषा शफीक सुरेश

सुरेश


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