इंफाल, 14 जनवरी (भाषा) मणिपुर सरकार ने बुधवार को कहा कि राज्य में विस्थापित लोगों को बसाया जाना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता बनी हुई है और सभी प्रस्तावित पुनर्वास स्थलों पर व्यापक सुरक्षा मूल्यांकन किया जा रहा है।
विस्थापित लोगों के प्रतिनिधियों और ‘मणिपुर इंटीग्रिटी कोऑर्डिनेटिंग कमेटी’ को लिखे पत्र में विशेष सचिव (गृह) ए. सुभाष सिंह ने कहा कि पुनर्वास प्रक्रिया कई कारकों पर निर्भर करती है। इनमें सुरक्षा स्थिति, पुनर्वास स्थल की तैयारी, भूमि की उपलब्धता, कोष की व्यवस्था, जलवायु की स्थिति और आजीविका की संभावनाएं शामिल हैं।
मणिपुर में मई 2023 से मेइती और कुकी समुदायों के बीच जातीय संघर्ष में कम से कम 260 लोग मारे गए और हजारों लोग बेघर हुए हैं। राज्य में फरवरी 2025 से राष्ट्रपति शासन लागू है।
पत्र में कहा गया, ‘‘आंतरिक रूप से विस्थापित व्यक्तियों का पुनर्वास सर्वोच्च प्राथमिकता है। यह प्रक्रिया एकबारगी या समय-सीमा पर आधारित उपाय के बजाय चरणबद्ध, गतिशील और व्यावहारिक ढंग से लागू की जा रही है।’’
सरकार ने कहा कि विभिन्न योजनाओं के तहत लगभग 60,000 विस्थापित व्यक्तियों को शामिल करते हुए एक व्यापक पुनर्वास योजना तैयार की गई है। इस योजना में केवल पुनर्वास ही नहीं, बल्कि विस्थापित व्यक्तियों की शिक्षा, आजीविका और समग्र कल्याण पर भी ध्यान दिया गया है।
पत्र के अनुसार, मणिपुर के बजट 2025-26 में घोषित 523 करोड़ रुपये के पुनर्वास और पुनर्स्थापन पैकेज के तहत चरणबद्ध पुनर्वास शुरू किया गया है।
पत्र में कहा गया कि पहले चरण में उन परिवारों का पुनर्वास शामिल है जिनके घर आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हो गए थे। दूसरे चरण में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (पीएमएवाई-जी) (विशेष पैकेज) के तहत अपने-अपने जिलों में आवास प्रदान किए गए परिवार शामिल हैं, जबकि तीसरे चरण में घाटी और पहाड़ी जिलों के बीच अंतर-जिला पुनर्वास शामिल है। इन सबके लिए बेहतर समन्वय, बुनियादी ढांचे के विकास और सुरक्षा व्यवस्था की आवश्यकता है।
भाषा आशीष प्रशांत
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