मणिपुर: राहत शिविरों में मौत होने पर न्यायालय ने जताई हैरानी, मुख्य सचिव से जवाब मांगा

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मणिपुर: राहत शिविरों में मौत होने पर न्यायालय ने जताई हैरानी, मुख्य सचिव से जवाब मांगा

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  • Publish Date - September 17, 2026 / 03:04 PM IST,
    Updated On - September 17, 2026 / 03:04 PM IST

नयी दिल्ली, 17 सितंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने मणिपुर के आंतरिक रूप से विस्थापित लोगों (आईडीपी) के लिए बनाए गए राहत शिविरों में कई लोगों की मौत होने पर बृहस्पतिवार को हैरानी जताई, साथ ही राज्य के मुख्य सचिव को निर्देश दिया कि वह वहां हुई मौतों की जांच, आपराधिक कार्रवाई शुरू करने और शिविरों में रह रहे लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी अदालत को दें।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची तथा न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने राज्य के शीर्ष नौकरशाह से पूछा कि न्यायमूर्ति गीता मित्तल समिति द्वारा राहत शिविरों में आईडीपी की मौतों के बारे में जानकारी दिए जाने के बावजूद कोई अहम कदम क्यों नहीं उठाया गया। इन मौतों में अप्राकृतिक मौत भी शामिल हैं।

पीठ ने अपने आदेश में कहा, ‘‘हम मणिपुर के मुख्य सचिव को राज्य के राहत शिविरों में हुई मौतों, विशेष रूप से अप्राकृतिक मौतों, पर हलफनामा दाखिल करने का निर्देश देते हैं।’’

अदालत ने यह भी पूछा कि 34 मौतों में से केवल 20 मामलों में ही पोस्टमार्टम क्यों किया गया।

पीठ ने कहा, ‘‘राज्य सरकार को यह भी स्पष्ट करना होगा कि राहत शिविरों में रहने के दौरान अप्राकृतिक मौत का शिकार हुए आंतरिक रूप से विस्थापितों के मामले में केवल 20,000 से 30,000 रुपये का मुआवजा क्यों दिया गया।

उच्चतम न्यायालय ने मणिपुर राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (एमएसएलएसए) को इस मुद्दे पर अलग से स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया।

प्रधान न्यायाधीश ने एमएसएलएसए से यह सुनिश्चित करने को कहा कि अप्राकृतिक मौतों के सभी मामलों में प्राथमिकी दर्ज की जाए।

पीठ ने एमएसएलएसए को यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि इन प्राथमीकियों पर शीघ्र जांच हो तथा राहत शिविरों में रहने वाले आईडीपीएस की सुरक्षा और गरिमा सुनिश्चित की जाए।

न्यायमूर्ति मित्तल समिति और एक आईएएस अधिकारी की रिपोर्ट देखने के बाद पीठ ने यह आदेश दिया। रिपोर्ट में बताया गया था कि मणिपुर के राहत शिविरों में 30 से ज़्यादा मौतें हुई हैं और इनमें से एक मौत कथित तौर पर यौन उत्पीड़न के बाद हुई थी।

इसके अलावा, पीठ ने उम्मीद जताई कि मणिपुर में 2023 की जातीय हिंसा से संबंधित वैसे मामलों की सुनवाई के लिए बनाई गईं दो विशेष निचली अलादतें जल्द ही अपने मामलों की सुनवाई पूरी करेंगी, जिसकी जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) और राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) के जिम्मे है।

पीठ ने कहा कि मामलों का विवरण विधिक सेवा अधिवक्ताओं को उपलब्ध करा दिया गया है और पीड़ित याचिकाकर्ता इन विवरणों का उपयोग अपने मामलों को आगे बढ़ाने के लिए कर सकते हैं।

सीबीआई और राज्य सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने बताया कि सीबीआई ने 31 मामलों की जांच पूरी की है, जिनमें से 28 मामलों में अंतिम रिपोर्ट दाखिल की जा चुकी है।

उन्होंने कहा कि सीबीआई के तीन मामलों में अब भी जांच जारी है। मणिपुर में जातीय हिंसा तीन मई 2023 को भड़की थी। यह हिंसा पहाड़ी जिलों में आयोजित आदिवासी एकजुटता मार्च के बाद शुरू हुई थी। यह मार्च बहुसंख्यक मेइती समुदाय को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने की मांग के विरोध में आयोजित किया गया था।

उस समय से अब तक 200 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, सैकड़ों लोग घायल हुए हैं और हजारों लोग विस्थापित हो चुके हैं।

भाषा शोभना सुरेश

सुरेश