आवारा पशुओं से होने वाली दुर्घटनाओं में मुआवजे के लिए तंत्र विकसित हो : न्यायालय

आवारा पशुओं से होने वाली दुर्घटनाओं में मुआवजे के लिए तंत्र विकसित हो : न्यायालय

आवारा पशुओं से होने वाली दुर्घटनाओं में मुआवजे के लिए तंत्र विकसित हो : न्यायालय
Modified Date: July 31, 2026 / 05:38 pm IST
Published Date: July 31, 2026 5:38 pm IST

नयी दिल्ली, 31 जुलाई (भाषा) सड़कों पर आवारा पशुओं के कारण होने वाली दुर्घटनाओं पर चिंता जताते हुए उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को केंद्र और राज्य सरकारों को ऐसी दुर्घटनाओं में मुआवजे के भुगतान के लिए एक तंत्र विकसित करने का निर्देश दिया।

न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने कई निर्देश जारी किए और कहा कि इन पशुओं के मालिकों को जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए तथा यह सुनिश्चित करना चाहिए कि पशु हर रोज दिन खत्म होने पर अपने निर्दिष्ट आवास पर लौट आएं।

पीठ ने कहा, ‘‘सभी राज्य जिन्होंने मवेशियों से संबंधित कानून बनाए हैं, उन्हें अक्षरशः और तत्काल कार्यान्वयन सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाने चाहिए। दोनों श्रेणियों – पैदल यात्री या वाहन चालक – के मामलों में पशुओं के परिणामस्वरूप होने वाली दुर्घटनाओं में मुआवजे के भुगतान के लिए एक तंत्र विकसित करने के लिए आवश्यक संशोधन किए जा सकते हैं या सक्षम प्राधिकारी द्वारा उचित समझे जाने वाले नियमों को शामिल किया जा सकता है।’’

शीर्ष अदालत ने सभी पशुओं की टैगिंग अनिवार्य किए जाने का निर्देश देते हुए कहा कि इससे उनकी निगरानी करने, उनकी दीर्घकालिक स्वास्थ्य सेवा सुनिश्चित करने, पशु चिकित्सा जांच और टीकाकरण से जुड़ने की क्षमता बढ़ती है।

यह निर्देश पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के एक आदेश को चुनौती देने वाली एक महिला द्वारा दायर अपील पर सुनवाई करते हुए आये। उच्च न्यायालय ने महिला को मिलने वाला 29.32 लाख रुपये का मुआवजा रद्द कर दिया था।

महिला के पति को सड़क पर चलते समय एक आवारा सांड ने टक्कर मार दी थी और सिर में चोट लगने से उनकी मौत हो गई थी।

पति की मृत्यु के बाद महिला ने पर्याप्त मुआवजे की मांग करते हुए उच्च न्यायालय में याचिका दायर की। एकल-न्यायाधीश पीठ ने मृतक की आय, आयु और अन्य प्रासंगिक कारकों के आधार पर मोटर वाहन अधिनियम, 1988 के तहत मुआवजे के अनुदान को नियंत्रित करने वाले सिद्धांतों को लागू करके मुआवजे का आकलन किया और मुआवजा दिए जाने का आदेश दिया।

हालांकि, खंडपीठ ने एकल-न्यायाधीश पीठ के आदेश को रद्द कर दिया था।

भाषा शफीक नरेश

नरेश


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