शिलांग, 17 फरवरी (भाषा) मेघालय विधानसभा के अध्यक्ष थामस ए. संगमा ने अवैध कोयला खदान में पिछले दिनों हुए विस्फोट का मामला अदालत में लंबित होने का हवाला देकर, मंगलवार को इस विषय पर सदन में चर्चा की अनुमति देने से इनकार कर दिया।
इस घटना में 33 लोगों की मौत हो गयी थी।
विपक्ष ने आसन के फैसले पर आपत्ति जताई और कार्यपालिका पर अवैध खनन की जांच से बचने के लिए कानूनी पेचीदगियों का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया।
संगमा ने सदन में कहा, ‘मुझे सूचना मिली है कि यह मामला अदालत में विचाराधीन है। तदनुसार, मैंने नियम 57, उप-धारा छह के आधार पर यह निर्णय लिया है। मैं अपने निर्णय पर कायम हूं और अध्यक्ष का निर्णय अंतिम है।’
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा ने सोमवार को इस घटना पर स्वतः संज्ञान लेते हुए बयान दिया था।
यह फैसला वॉइस ऑफ द पीपल पार्टी (वीपीपी) के विधायक अर्देंट बसाईवमोइट की मांग के बाद आया। उन्होंने तर्क दिया था कि कार्यपालिका द्वारा बार-बार मामले की सुनवाई के लिए ‘अदालत में लंबित’ नियम का इस्तेमाल करना सार्वजनिक हित के मामलों पर विचार-विमर्श करने की विधायिका की स्वतंत्रता को कमजोर कर रहा है।
बसाईवमोइट ने कहा, “विधायिका के रूप में, हमें जनता को प्रभावित करने वाले मुद्दों पर चर्चा करने की स्वतंत्रता है। यहां तक कि अदालतों ने भी माना है कि किसी मामले के उनके समक्ष लंबित होने मात्र से विधायी चर्चा पर रोक नहीं लगाई जा सकती।”
उन्होंने स्पष्ट किया कि सदस्य दोषी या निर्दोष होने के विषय पर बहस नहीं करना चाहते थे और न ही न्यायिक निर्णयों में हस्तक्षेप करना चाहते थे, बल्कि अवैध कोयला खनन से संबंधित प्रशासनिक चूक और नीतिगत विफलताओं पर विचार करना चाहते थे।
उन्होंने अध्यक्ष से इस संबंध में सार्थक चर्चा की अनुमति देने का आग्रह करते हुए कहा, “हम जानते हैं कि हम न्यायिक निष्कर्षों पर चर्चा नहीं कर सकते, लेकिन हम प्रशासनिक विफलताओं पर विचार-विमर्श कर सकते हैं ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों। कार्यपालिका को इस प्रावधान की आड़ नहीं लेनी चाहिए।”
विधानसभा में विपक्ष के नेता मुकुल संगमा ने इस मांग का समर्थन करते हुए बसाईवमोइट की बात को “प्रासंगिक” बताया और इस बात पर जोर दिया कि सार्वजनिक सुरक्षा और शासन से जुड़े मामलों में विधायी निगरानी आवश्यक है।
हालांकि, विपक्ष की अपील के बावजूद अध्यक्ष ने अपने फैसले पर पुनर्विचार से इनकार कर दिया।
उन्होंने कहा, ‘मैंने अपना निर्णय ले लिया है, इसलिए हम इस पर आगे चर्चा नहीं करेंगे।’
भाषा राखी अविनाश
अविनाश