नयी दिल्ली, 17 फरवरी (भाषा) सरकार ने एआई प्रणालियों को भारतीय डेटा पर आधारित बनाने और पूर्वाग्रह से संबंधित चिंताओं को दूर करने के उद्देश्य से स्वदेशी एआई मॉडल विकसित करने में निवेश किया है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने मंगलवार को यह जानकारी दी।
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन ने कहा कि स्वायत्तता बहुत महत्वपूर्ण है। भारत को ऐसे एआई मॉडल की जरूरत है, जिनका नियंत्रण पूरी तरह भारत के पास हो और किसी अन्य देश के पास इसे रोकने या बदलने का अधिकार न हो।
कृष्णन ने बताया कि इतने बड़े देश के लिए यह जरूरी है कि वह यह नियंत्रित कर सके कि उसके एआई मॉडल कैसे काम करते हैं। शुरू में यह चर्चा थी कि भारत को अपना स्वदेशी मॉडल बनाना चाहिए या फिर विदेश में बने ओपन सोर्स मॉडल का उपयोग करना चाहिए। क्योंकि अपना मॉडल बनाना महंगा और समय लेने वाला काम माना जाता था। लेकिन कई विचार-विमर्श के बाद भारत ने अपने एआई मॉडल विकसित करने का निर्णय लिया।
उन्होंने कहा कि सबसे पहला कारण पूर्वाग्रह को दूर करना है। इसके लिए मॉडल मुख्य रूप से भारतीय डेटा और भारतीय भाषाओं में बनाए गए डेटा पर आधारित होने चाहिए।
कृष्णन ने बताया कि दूसरा कारण भारत की भाषाई विविधता है। लोग चाहते हैं कि एआई उनकी अपनी भाषा में काम करे। इसलिए भारत में वॉइस और टेक्स्ट आधारित मॉडल विकसित करना जरूरी है।
कृष्णन ने यह भी कहा कि भारत का लक्ष्य बड़े भाषा मॉडल बनाना नहीं है, बल्कि ऐसे मॉडल तैयार करना है जिन्हें लोग अपनी भाषा में आसानी से इस्तेमाल कर सकें और जो विज्ञान, कृषि और उद्योग जैसे क्षेत्रों में काम आएं।
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योगेश अजय
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