नयी दिल्ली, 12 सितंबर (भाषा) कांग्रेस ने ब्रिक्स को ‘ग्लोबल साउथ’ की आकांक्षाओं को आगे बढ़ाने और वैश्विक स्थिति को आकार देने वाला महत्वपूर्ण मंच बताते हुए शनिवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तथा उनकी सरकार को भारत का ऐतिहासिक कूटनीतिक दर्जा बहाल करने का प्रयास करना चाहिए।
‘ग्लोबल साउथ’ से तात्पर्य उन देशों से है जिन्हें अक्सर विकासशील, कम विकसित अथवा अविकसित के रूप में जाना जाता है और ये मुख्य रूप से अफ्रीका, एशिया और लातिन अमेरिका में स्थित हैं।
पार्टी के विदेश विभाग के प्रमुख सलमान खुर्शीद ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से इतर एक बयान में कहा कि भू-राजनीतिक टकराव, आर्थिक दबाव, आपूर्ति श्रृंखला की कमजोरियों, संघर्ष और जलवायु संकट के दौर में भारत को ब्रिक्स साझेदारों के साथ मिलकर एक न्यायसंगत और संतुलित विश्व व्यवस्था के निर्माण के लिए काम करना चाहिए, जो सभी लोगों के लिए सुरक्षा, समृद्धि और गरिमा सुनिश्चित कर सके।
पूर्व विदेश मंत्री खुर्शीद ने कहा कि भारत को ब्रिक्स में नैतिक नेतृत्व और रणनीतिक स्पष्टता प्रदान करनी चाहिए तथा साथ ही अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देनी चाहिए।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि, ‘भारत को नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, संप्रभु समानता, शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व और मानवीय गरिमा के सिद्धांतों को आगे बढ़ाते हुए अपने रणनीतिक और आर्थिक उत्थान पर भी ध्यान देना चाहिए।’
कांग्रेस नेता ने कहा, ‘ प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा सरकार को भारत की ऐतिहासिक कूटनीतिक भूमिका और दर्जे को बहाल करने के लिए विशेष कदम उठाने चाहिए।’’
कांग्रेस नेता के अनुसार, भारत को ‘ग्लोबल साउथ’ के साझेदारों के बीच विश्वास फिर से कायम करने के लिए यह दिखाना होगा कि संकट के समय भी वह एक विश्वसनीय और मजबूत साझेदार है।
खुर्शीद ने कहा कि ब्रिक्स देशों की वैश्विक वस्तु व्यापार में हिस्सेदारी 19.6 प्रतिशत है, लेकिन भारत के ब्रिक्स देशों के साथ व्यापारिक संबंध अभी भी ‘‘काफी असंतुलित’’ हैं।
उन्होंने सरकार से भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता का इस्तेमाल भारतीय वस्तुओं और सेवाओं के लिए अधिक बाजार पहुंच सुनिश्चित करने तथा शुल्क और बाजार संबंधी अन्य बाधाओं को दूर करने, के लिए करने की मांग की।
उन्होंने ‘ब्रिक्स पे सिस्टम’ से जुड़े प्रयासों का स्वागत करते हुए कहा कि भारतीय कंपनियों के लिए ब्रिक्स देशों में प्रतिस्पर्धा और विस्तार की निष्पक्ष एवं पूर्वानुमेय परिस्थितियां सुनिश्चित की जानी चाहिए। साथ ही आपूर्ति श्रृंखलाओं की सुरक्षा और समावेशी संपर्क व्यवस्था पर सहमति बनाने की दिशा में प्रयास होने चाहिए।
खुर्शीद ने आकस्मिक रिजर्व व्यवस्था (सीआरए) को भी सक्रिय करने की मांग की। यह व्यवस्था 2014 में स्थापित की गई थी और इसमें भारत ने 18 अरब अमेरिकी डॉलर देने की प्रतिबद्धता जताई थी।
खुर्शीद ने कहा कि 2021 में भारत की अध्यक्षता में हुए ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में किए गए वादों को भी ठोस तरीके से आगे बढ़ाया जाना चाहिए। इनमें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता की दावेदारी के लिए मजबूत समर्थन हासिल करना शामिल है।
उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रधानमंत्री ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हुई चर्चा और अंतिम रूप दिए गए निर्णयों के बारे में देश को अवगत कराने के लिए एक संवाददाता सम्मेलन करेंगे।
कांग्रेस नेता ने कहा कि 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का इस्तेमाल सदस्य देशों के बीच एकजुटता मजबूत करने के लिए किया जाना चाहिए, लेकिन इसे गुटीय राजनीति का मंच नहीं बनने देना चाहिए।
खुर्शीद ने कहा कि भारत को यह प्रदर्शित करना चाहिए कि वह अपने हितों को आगे बढ़ाने के लिए पर्याप्त रूप से मजबूत है, अधिक न्यायपूर्ण विश्व व्यवस्था की मांग करने वालों के साथ खड़े होने के लिए सिद्धांतवादी है और ग्लोबल साउथ तथा ग्लोबल नॉर्थ के बीच एक विश्वसनीय सेतु की भूमिका निभाने के लिए पर्याप्त भरोसेमंद है।
भाषा हक नेत्रपाल शोभना
शोभना