नयी दिल्ली, 22 जुलाई (भाषा) भारतीय विश्वविद्यालयों के संघ (एआईयू) ने देशभर के विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों (एचईआई) से छात्रों को परामर्श प्रदान करने और उन्हें हालिया परीक्षा विवादों को लेकर हो रहे प्रदर्शनों में भाग लेने से हतोत्साहित करने को कहा है, ताकि वे अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित रख सकें।
एआईयू ने कहा कि लंबे समय तक चलने वाले आंदोलनों का छात्रों की शैक्षणिक प्रगति पर ‘‘गंभीर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।’’
सदस्य संस्थानों के कुलपतियों और निदेशकों को लिखे पत्र में एआईयू के अध्यक्ष विनय कुमार पाठक ने विश्वविद्यालयों से छात्रों के साथ ‘संवेदनशीलता और सहानुभूति के साथ संवाद’ करने का आग्रह किया। साथ ही उन्होंने छात्रों को अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित रखने और विरोध-प्रदर्शनों के आह्वान से अपनी ऊर्जा भटकने नहीं देने के लिए प्रोत्साहित करने को कहा।
‘‘छात्रों को अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित रखने और परीक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने की जारी प्रक्रिया पर विश्वास बनाए रखने के लिए प्रोत्साहित करने की अपील करें’ शीर्षक वाले इस पत्र में स्वीकार किया गया है कि छात्रों की चिंताएं महत्वपूर्ण हैं और उन्हें सहानुभूति एवं सम्मान के साथ सुना जाना चाहिए।
हालांकि, एआईयू का कहना था कि लंबे समय तक चलने वाले आंदोलन ‘सबसे अधिक कीमत स्वयं छात्रों से ही वसूलते हैं’, क्योंकि इससे पढ़ाई बाधित होती है, परीक्षा की तैयारी प्रभावित होती है और अनावश्यक तनाव बढ़ता है।
यह परामर्श ऐसे समय जारी किया गया है जब राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा-स्नातक (नीट-यूजी) 2026 के प्रश्नपत्र लीक के विरोध में छात्र दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन जारी रखे हुए हैं। छात्र परीक्षा प्रणाली में सुधार, सार्वजनिक परीक्षाओं में अधिक जवाबदेही और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
भाषा अमित नरेश
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