एमपीडी-2047 में सुलभ दिल्ली का वादा, विशेषज्ञों ने दिव्यांगता संबंधी केपीआई नहीं होने पर जताई चिंता

एमपीडी-2047 में सुलभ दिल्ली का वादा, विशेषज्ञों ने दिव्यांगता संबंधी केपीआई नहीं होने पर जताई चिंता

एमपीडी-2047 में सुलभ दिल्ली का वादा, विशेषज्ञों ने दिव्यांगता संबंधी केपीआई नहीं होने पर जताई चिंता
Modified Date: September 2, 2026 / 04:48 pm IST
Published Date: September 2, 2026 4:48 pm IST

नयी दिल्ली, दो सितंबर (भाषा) हाल में अधिसूचित दिल्ली के नये मास्टर प्लान (एमपीडी-2047) में दिव्यांगजनों के लिए बाधामुक्त मार्ग, सार्वभौमिक पहुंच और समावेशी सार्वजनिक स्थलों की बात बार-बार की गई है लेकिन विशेषज्ञों ने इसकी रूपरेखा में दिव्यांगता से संबंधित कोई प्रमुख प्रदर्शन संकेतक (केपीआई) नहीं होने पर सवाल उठाए हैं।

विशेषज्ञों ने इस बात को लेकर चिंता जतायी है कि योजना की निगरानी रूपरेखा में पहुंच संबंधी कोई समर्पित संकेतक नहीं होने के कारण क्या ये विकास प्रतिबद्धताएं वास्तव में ऐसा शहर बनाने में तब्दील हो पाएंगी, जहां दिव्यांगजन एक छोर से दूसरे छोर तक आसानी से आ-जा सकें।

दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) द्वारा तैयार और केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल द्वारा 20 अगस्त को जारी किए गए मास्टर प्लान में कहा गया है कि भू-उपयोग चाहे जो भी हो, सभी भवनों को बाधामुक्त निर्मित वातावरण के लिए निर्धारित स्थान मानकों का पालन करना होगा।

योजना में पैदल यात्री बुनियादी ढांचे को ऐसे समावेशी नागरिक स्थलों के रूप में विकसित करने का आह्वान किया गया है जिनमें बुजुर्गों, बच्चों और दिव्यांगजनों को प्राथमिकता दी जाए।

इसमें यह भी अनिवार्य किया गया है कि स्कूल दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम के प्रावधानों का पालन करें तथा ऑफ-स्ट्रीट सार्वजनिक पार्किंग में दिव्यांगजनों के लिए स्थान आरक्षित किए जाएं।

योजना में कहा गया है कि मेट्रो और ट्रांजिट स्टेशन के आसपास के क्षेत्रों के लिए बहु-माध्यम एकीकरण (एमएमआई) योजनाओं में ‘‘सुरक्षित, बाधामुक्त और पैदल चलने योग्य पहुंच’’ सुनिश्चित की जानी चाहिए। साथ ही, पूरे शहर में ‘‘सार्वभौमिक रूप से सुलभ सड़कों’’ के जरिये पैदल चलने की सुविधा बेहतर बनाने की बात कही गई है।

वास्तुकार और पहुंच संबंधी सलाहकार अनूभा सिंघल ने कहा कि एमपीडी-2047 का वास्तविक वादा केवल अधिक सुलभ इमारतों तक सीमित नहीं है बल्कि सड़कों, मोहल्लों, परिवहन और रोजमर्रा की यात्राओं सहित पूरे शहर की पहुंच को बेहतर बनाने में है।

उन्होंने कहा, ‘‘महत्वपूर्ण सवाल जवाबदेही का है : जब एक यात्रा को पूरा करने में इतनी सारी एजेंसियां भूमिका निभाती हैं, तो यह कौन सुनिश्चित करेगा कि पूरी यात्रा सुलभ बनी रहे?’’

दिव्यांगता समावेशन शोधकर्ता काव्या मुखिजा ने कहा कि एमपीडी-2047 सार्वभौमिक पहुंच के लिए महत्वपूर्ण प्रतिबद्धताएं करता है और स्थानिक नियोजन में दिव्यांगजनों को मान्यता देता है, लेकिन पहुंच का दायरा मुख्य रूप से बुनियादी ढांचे तक सीमित है और योजना के प्रमुख संकेतकों में इसका कोई उल्लेख नहीं है।

उन्होंने कहा, ‘‘जोखिम यह है कि हम मुख्यधारा के स्कूलों, पार्कों, परिवहन और सार्वजनिक स्थलों को स्वाभाविक रूप से समावेशी बनाने के बजाय केवल चिन्हित सुलभ सुविधाएं तैयार कर दें।’’

ग्रीन डिसएबिलिटी के संस्थापक पुनीत सिंह सिंघल ने कहा कि उनकी चिंता यह है कि दिल्ली ‘‘कागज पर अधिक सुलभ’’ बन जाए, लेकिन दिव्यांग लोगों के लिए वास्तव में यहां रहना काफी आसान न हो।

उन्होंने कहा, ‘‘पहुंच को पूरी यात्रा के अनुभव के आधार पर मापा जाना चाहिए। घर से निकलने, फुटपाथ पर चलने, सड़क पार करने, सार्वजनिक परिवहन तक पहुंचने, कार्यस्थल या अस्पताल में प्रवेश करने और सुरक्षित तथा स्वतंत्र रूप से घर लौटने तक।’’

योजना में निगरानी रूपरेखा के तहत 2047 तक शहर के उद्देश्यों की दिशा में प्रगति पर नजर रखने के लिए अनुलग्नक-14 में 20 सुझाए गए प्रमुख प्रदर्शन संकेतक (केपीआई) प्रस्तावित किए गए हैं।

इनमें वायु और जल प्रदूषण, हरित क्षेत्र, बाढ़ का जोखिम, अपशिष्ट जल का पुन: उपयोग, भूजल स्तर, लैंडफिल पर दबाव, नवीकरणीय ऊर्जा का इस्तेमाल, भूकंप और अग्नि सुरक्षा, छोटे आकार के आवास, झुग्गी पुनर्वास, सार्वजनिक परिवहन की ओर बदलाव, स्वच्छ ईंधन वाले वाहन, मानव विकास सूचकांक, विरासत संरक्षण, सड़कों की जीवंतता और महिला श्रमबल भागीदारी जैसे क्षेत्र शामिल हैं।

विशेषज्ञों ने कहा कि इन 20 संकेतकों में दिव्यांगजनों के लिए पहुंच की निगरानी करने वाला कोई अलग केपीआई नहीं है।

योजना तैयार करने से जुड़े अधिकारियों ने पहले बताया था कि एमपीडी-2047 की परामर्श प्रक्रिया में 2020 में हितधारकों के साथ विचार-विमर्श के दौरान दिव्यांगजनों के साथ विशेष सत्र आयोजित किए गए थे। योजना में विशेष स्थानीय क्षेत्र योजनाओं में युवाओं, महिलाओं और बच्चों के साथ दिव्यांगजनों के लिए भी प्रावधान करने की बात स्पष्ट रूप से कही गई है।

भाषा अमित नरेश

नरेश


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