मुर्मू ने आईएमए की ‘पासिंग आउट परेड’ का निरीक्षण किया; नौ महिला अफसरों का पहला बैच सेना में शामिल

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मुर्मू ने आईएमए की ‘पासिंग आउट परेड’ का निरीक्षण किया; नौ महिला अफसरों का पहला बैच सेना में शामिल

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  • Publish Date - June 13, 2026 / 03:37 PM IST,
    Updated On - June 13, 2026 / 03:37 PM IST

(तस्वीरों के साथ)

देहरादून, 13 जून (भाषा) राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शनिवार को यहां भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) में 158वें नियमित पाठ्यक्रम और 141वें तकनीकी स्नातक पाठ्यक्रम की ‘पासिंग आउट परेड’ का निरीक्षण किया और इस दौरान भारतीय सेना में नौ महिला अधिकारी कैडेट के पहले बैच को शामिल किया गया जोकि एक ऐतिहासिक उपलब्धि है।

समारोह में उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, सेना प्रशिक्षण कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल देवेंद्र शर्मा, भारतीय सैन्य अकादमी के कमांडेंट लेफ्टिनेंट जनरल नागेंद्र सिंह, वरिष्ठ सैन्य अधिकारी और कैडेटों के परिजन शामिल हुए।

परेड के बाद कुल 515 अधिकारी कैडेट को भारतीय सेना में शामिल किया गया जिनमें नौ महिला अधिकारी कैडेट भी शामिल हैं। उत्तीर्ण होने वाले कैडेट में 16 मित्र देशों के 34 अधिकारी कैडेट भी शामिल हैं जो अपने-अपने देशों के सशस्त्र बलों में शामिल होंगे।

अधिकारियों ने कहा कि महिला अधिकारी कैडेटों को शामिल किया जाना इस संस्थान के लिए एक ऐतिहासिक क्षण है। आईएमए ने 1932 में स्थापना के बाद से सेना के पुरुष अधिकारियों की कई पीढ़ियों को प्रशिक्षित किया है।

समारोह के दौरान उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले कई कैडेट को सम्मानित किया गया। अकादमी कैडेट एडजुटेंट विशाल कुमार को नियमित पाठ्यक्रम में प्रथम स्थान प्राप्त करने पर ‘स्वॉर्ड ऑफ ऑनर’ और स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया।

अकादमी अंडर ऑफिसर प्रिंस राज को रजत पदक जबकि सीनियर अंडर ऑफिसर तेजस भट्ट को कांस्य पदक मिला।

अन्य पाठ्यक्रमों में अधिकारी कैडेट ऋषभ मिश्रा ने तकनीकी स्नातक पाठ्यक्रम (टीजीसी) में प्रथम स्थान प्राप्त किया और उन्हें रजत पदक दिया गया। अधिकारी कैडेट बोध राज थापा विशेष कमीशन अधिकारी (एससीओ) पाठ्यक्रम में प्रथम रहे तथा अधिकारी कैडेट करण पांडे ने तकनीकी प्रवेश योजना (टीईएस) पाठ्यक्रम में पहला स्थान हासिल किया।

जूनियर अंडर ऑफिसर जैफ सदीद अल्वी को ‘सर्वश्रेष्ठ विदेशी अधिकारी कैडेट’ ट्रॉफी प्रदान की गई।

इस अवसर पर राष्ट्रपति ने देश के सबसे कठोर प्रशिक्षण कार्यक्रमों में से एक को पूरा करने के लिए कैडेटों को बधाई देते हुए कहा कि उनका साहस एवं विवेक सेवा के दौरान उनका मार्गदर्शन करेगा।

उन्होंने नौ महिला कैडेट को शामिल किए जाने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इसे आईएमए के इतिहास में ‘‘महत्वपूर्ण मोड़’’ करार दिया।

उन्होंने कहा कि यह केवल रक्षा बलों के लिए एक उपलब्धि नहीं है, बल्कि महिला-नेतृत्व वाले विकास की दिशा में भारत की प्रगति का प्रेरणादायी उदाहरण भी है। उन्होंने विश्वास जताया कि भविष्य में और अधिक महिला कैडेट अकादमी से जुड़ेंगी।

राष्ट्रपति ने विदेशी कैडेटों को भी बधाई देते हुए कहा कि उनके देशों ने उन्हें सैन्य पेशेवर दक्षता के उच्चतम स्तर पर प्रशिक्षित करने की जिम्मेदारी भारत को सौंपी है। उन्होंने विश्वास जताया कि वे आईएमए में मिली शिक्षा और मूल्यों पर आधारित अपनी सेवा के जरिये अपने-अपने सशस्त्र बलों और देशों का गौरव बढ़ाएंगे।

उन्होंने कहा कि विदेशी कैडेटों की मौजूदगी वैश्विक स्तर पर मित्रता, सहयोग और शांतिपूर्ण संबंधों को बढ़ावा देने की भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि इस संस्थान में कैडेटों के बीच आपसी विश्वास, समझ और पेशेवर संबंध विकसित होते हैं जो देशों के बीच रक्षा सहयोग को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

राष्ट्रपति ने अधिकारी कैडेटों से कहा कि वे देश की संप्रभुता, एकता और अखंडता के रक्षक हैं और उनके कंधों पर 140 करोड़ से अधिक नागरिकों का भरोसा है। उन्होंने उनसे हमेशा यह याद रखने को कहा कि सेवा सबसे बड़ा कर्तव्य है।

उन्होंने कहा कि तेजी से बदलती सुरक्षा चुनौतियों, तकनीकी प्रगति और जटिल वैश्विक परिस्थितियों के इस दौर में भारतीय सेना को स्थिति के अनुसार ढलने वाला बनना होगा और भविष्य के लिए तैयार रहना होगा। उन्होंने युवा अधिकारियों से जीवनभर सीखने वाले, साहसिक निर्णय लेने वाले और नैतिक मूल्यों वाले वाले अधिकारी बनने का आह्वान किया।

मुर्मू ने कहा कि सेना के अधिकारी के रूप में कैडेटों की जिम्मेदारी अपने सैनिकों का नेतृत्व करने, उनका मार्गदर्शन करने और उनका ध्यान रखने की होगी। उन्होंने कहा कि इन अधिकारियों को उदाहरण पेश करते हुए नेतृत्व करना होगा, आत्मविश्वास भरना होगा और टीम भावना एवं समर्पण को बढ़ावा देना होगा।

उन्होंने कहा कि अभियानगत प्रभावशीलता और अपने कर्मियों के कल्याण के बीच संतुलन बनाकर वे विश्वास कायम करेंगे और अपनी इकाइयों की युद्धक क्षमता को मजबूत करेंगे। राष्ट्रपति ने कहा कि उनसे अपेक्षा है कि वे आगे रहकर नेतृत्व करें, अपने सैनिकों का ध्यान रखें और सशस्त्र बलों की सर्वोत्तम परंपराओं को बनाए रखें।

भाषा सिम्मी पवनेश

पवनेश