दक्षिण-पूर्व एशिया के लिए भारत का प्रवेश-द्वार है म्यांमा: राष्ट्रपति मुर्मू

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दक्षिण-पूर्व एशिया के लिए भारत का प्रवेश-द्वार है म्यांमा: राष्ट्रपति मुर्मू

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  • Publish Date - June 1, 2026 / 09:58 PM IST,
    Updated On - June 1, 2026 / 09:58 PM IST

नयी दिल्ली, एक जून (भाषा) राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सोमवार को कहा कि म्यांमा दक्षिण-पूर्व एशिया के लिए भारत का प्रवेश द्वार है और देश की ‘पड़ोसी पहले’ और ‘एक्ट ईस्ट’ नीतियों में एक महत्वपूर्ण भागीदार है।

राष्ट्रपति भवन में म्यांमा के राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग का स्वागत करते हुए मुर्मू ने कहा कि भारत और म्यांमा सदियों पुराने गहरे सांस्कृतिक, सभ्यतागत एवं आध्यात्मिक संबंधों से जुड़े हुए हैं।

उन्होंने कहा, “हमारे संबंध आपसी समझ और मित्रता की एक मजबूत नींव पर आधारित हैं। म्यांमा दक्षिण-पूर्व एशिया तक पहुंचने के लिए भारत का प्रवेश-द्वार है, क्योंकि यह एकमात्र ऐसा आसियान देश है जिसकी जमीनी सीमा भारत से लगती है। यह भारत की ‘पड़ोसी प्रथम’, ‘एक्ट ईस्ट’ और ‘महासागर’ नीतियों में एक महत्वपूर्ण भागीदार है।”

राष्ट्रपति आंग ह्लाइंग भारत की पांच दिवसीय यात्रा पर हैं।

राष्ट्रपति मुर्मू ने म्यांमा के राष्ट्रपति के रूप में पदभार ग्रहण करने पर राष्ट्रपति ह्लाइंग को बधाई दी और कहा कि भारत द्विपक्षीय साझेदारी को और अधिक सुदृढ़ करने के लिए नयी सरकार के साथ मिलकर काम करने को उत्सुक है।

उन्होंने कहा कि भारत, म्यांमा सरकार की प्राथमिकताओं के अनुसार उसके प्रयासों में सहयोग देने के लिए तत्पर है।

मुर्मू ने म्‍यांमा की शांति और सुलह के प्रयासों के प्रति भारत के अटूट समर्थन को अभिव्‍यक्‍त किया।

राष्ट्रपति ने कहा कि कनेक्टिविटी भारत-म्यांमा साझेदारी का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि पहले से चल रही परियोजनाएं म्यांमा सरकार के सहयोग से जल्द से जल्द पूरी हो जाएंगी।

भाषा प्रशांत वैभव

वैभव