नड्डा ने बंगाल के सांसदों से टीबी उन्मूलन के लिए जन आंदोलन की अगुवाई करने को कहा
नड्डा ने बंगाल के सांसदों से टीबी उन्मूलन के लिए जन आंदोलन की अगुवाई करने को कहा
नयी दिल्ली, 30 जुलाई (भाषा) केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने बृहस्पतिवार को पश्चिम बंगाल के सांसदों से टीबी के खिलाफ जन आंदोलन का नेतृत्व करने का आग्रह किया, जिसमें मजबूत सामुदायिक भागीदारी, शीघ्र पता लगाने और जिला-स्तरीय निगरानी पर जोर दिया गया ताकि भारत को 2030 तक इस बीमारी को खत्म करने के अपने लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिल सके।
नड्डा ने यहां विस्तारित संसद भवन एनेक्सी में संसद के मानसून सत्र के मौके पर पश्चिम बंगाल के संसद सदस्यों के साथ ‘‘टीबी-मुक्त भारत की वकालत करने वाले सांसद’’ शीर्षक से एक बैठक की अध्यक्षता की। उनके साथ केंद्रीय शिक्षा और उत्तर पूर्वी क्षेत्र विकास राज्य मंत्री डॉ. सुकांत मजूमदार भी शामिल हुए।
स्वास्थ्य मंत्रालय के एक बयान में कहा गया है कि बैठक में राजनीतिक नेतृत्व और सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से टीबी-मुक्त भारत को प्राप्त करने की दिशा में सामूहिक प्रयासों को मजबूत करने के लिए पार्टी लाइन से परे पश्चिम बंगाल के लोकसभा और राज्यसभा के सदस्यों को एक साथ लाया गया।
यह बैठक केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री की अध्यक्षता में हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान, तमिलनाडु और अन्य राज्यों के सांसदों के साथ जागरुकता लाने संबंधी एक शृंखला का हिस्सा थी।
बयान में कहा गया, ‘‘‘नड्डा ने सदस्यों को सूचित किया कि टीबी उन्मूलन में तेजी लाने के लिए सरकार के संपूर्ण सरकारी दृष्टिकोण के तहत अन्य राज्यों के सांसदों के साथ भी इसी तरह का परामर्श किया गया है।’’
इसमें कहा गया कि बैठक में टीबी उन्मूलन की दिशा में भारत के प्रयासों में तेजी लाने के लिए दो चरणों में लागू किए गए 100-दिवसीय टीबी-मुक्त भारत अभियान के तहत हुई प्रगति की समीक्षा की गई।
पहला चरण, 7 दिसंबर, 2024 को शुरू किया गया। शुरू में राष्ट्रव्यापी विस्तार से पहले 347 उच्च प्राथमिकता वाले जिलों को कवर किया गया और 24 मार्च, 2025 को यह चरण समाप्त हुआ।
बीते 24 मार्च को शुरू किया गया दूसरा चरण, देश भर के लगभग 1.58 लाख उच्च जोखिम वाले गांवों और शहरी वार्डों पर केंद्रित था।
बैठक को संबोधित करते हुए, नड्डा ने अभियान को ‘‘तपेदिक के खिलाफ नवाचार, करुणा और अटूट राजनीतिक इच्छाशक्ति पर आधारित देश की लड़ाई में एक निर्णायक क्षण’’ बताया।
बयान में कहा गया है कि उन्होंने दोहराया कि टीबी मुक्त भारत अभियान का मुख्य उद्देश्य 2030 तक टीबी को खत्म करने के सतत विकास लक्ष्य को हासिल करना है।
भाषा वैभव हक
हक

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