ओडिशा: भाजपा का दावा, नया खनन कानून राज्य के लिए फायदेमंद

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ओडिशा: भाजपा का दावा, नया खनन कानून राज्य के लिए फायदेमंद

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  • Publish Date - August 17, 2026 / 10:43 PM IST,
    Updated On - August 17, 2026 / 10:43 PM IST

भुवनेश्वर, 17 अगस्त (भाषा) ओडिशा में सत्तारूढ़ भाजपा ने सोमवार को दावा किया कि हाल में पारित खान और खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 से राज्य को किसी तरह के राजस्व का नुकसान नहीं होगा। पार्टी ने कहा कि इसके बजाय अधिक प्रतिस्पर्धी खनन बाजार से राज्य को लाभ मिलेगा।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की राज्य इकाई का बयान ऐसे समय आया है जब विपक्षी पार्टियां बीजद और कांग्रेस इस विधेयक के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू करने की तैयारी कर रही हैं। उनका आरोप है कि यह विधेयक ओडिशा की वित्तीय स्वायत्तता को कमजोर करेगा और खनिज संपदा से भरपूर क्षेत्रों पर राज्य के अधिकारों को कम करेगा।

बीजू जनता दल (बीजद) अध्यक्ष नवीन पटनायक और ओडिशा प्रदेश कांग्रेस कमेटी (ओपीसीसी) के अध्यक्ष भक्त चरण दास ने विधेयक के राज्य की अर्थव्यवस्था पर संभावित प्रभाव पर चर्चा के लिए सर्वदलीय बैठक और विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की मांग की है।

बीजद ने दावा किया है कि यदि यह कानून लागू होता है, तो ओडिशा को सालाना करीब 12,000 करोड़ रुपये का नुकसान हो सकता है।

भाजपा प्रवक्ता अनिल बिस्वाल ने इस आरोप को खारिज करते हुए कहा, ‘‘नया संशोधन ओडिशा के राजस्व में किसी भी तरह एक रुपये की भी कमी नहीं करेगा, बल्कि प्रतिस्पर्धी बाजार में राज्य को अधिक राजस्व मिलेगा।’’

बिस्वाल ने कहा कि कांग्रेस शासन के दौरान 2013 में ओडिशा को खनन रॉयल्टी से करीब 5,000 करोड़ रुपये मिले थे, जबकि 2015 में खान और खनिज (विकास एवं विनियमन) (एमएमडीआर) अधिनियम में संशोधन के बाद राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार के तहत यह राशि बढ़कर सालाना 48,000 करोड़ रुपये हो गई।

उन्होंने कहा, ‘‘राज्य को खनिज संसाधनों की पारदर्शी तरीके से नीलामी से अप्रत्याशित रूप से भारी लाभ मिला, जो पहले केंद्र में कांग्रेस शासन के दौरान संभव नहीं था।’’

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त मंत्री पंचानन कानूनगो ने हालांकि भाजपा के दावों को खारिज कर दिया।

उन्होंने कहा, ‘‘कांग्रेस शासन के दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में लौह अयस्क की कीमत केवल 200 से 300 रुपये प्रति टन थी। बाद में यह बढ़कर 3,000 से 4,000 रुपये प्रति टन हो गई। इसलिए खनिज रॉयल्टी से होने वाले राजस्व में बढ़ोतरी कोई हैरानी की बात नहीं है।’’

भाषा आशीष वैभव

वैभव