मकान टूटने के कारण बेला एस्टेट के 728 मतदाताओं के नाम मसौदा मतदाता सूची से हटे : अधिकारी

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मकान टूटने के कारण बेला एस्टेट के 728 मतदाताओं के नाम मसौदा मतदाता सूची से हटे : अधिकारी

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  • Publish Date - September 11, 2026 / 11:57 AM IST,
    Updated On - September 11, 2026 / 11:57 AM IST

नयी दिल्ली, 11 सितंबर (भाषा) दिल्ली के निर्वाचन अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि बेला एस्टेट की झुग्गी बस्ती के 728 मतदाताओं के नाम मसौदा मतदाता सूची से इसलिए हटाए गए क्योंकि उनके मकान ध्वस्त कर दिए गए थे।

यह स्पष्टीकरण मीडिया में आई उन खबरों के बाद बृहस्पतिवार को दिया गया, जिनमें बताया गया था कि चांदनी चौक विधानसभा क्षेत्र के भाग संख्या 38, जेजे बेला एस्टेट-विजय घाट में पंजीकृत 729 मतदाताओं में से 728 के नाम 31 अगस्त को प्रकाशित मसौदा मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं।

यमुना के पश्चिमी तट पर स्थित और पारिस्थितिकीय रूप से संवेदनशील जोन-ओ में आने वाली इस बस्ती में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की शुरुआत से पहले 729 पंजीकृत मतदाता थे। मसौदा सूची में केवल एक नाम बचा, जिससे इस मतदान केंद्र पर नाम हटने की दर करीब 99.8 प्रतिशत रही।

निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ) कार्यालय के एक आधिकारिक बयान के अनुसार, खबरों के बाद पहले के मतदान केंद्र संख्या 33 की मतदाता सूची की जांच की गई। इसमें पाया गया कि अधिकतर मतदाताओं के पते में केवल ‘कृषि’ दर्ज था, जबकि कुछ ही मतदाताओं के लिए मकान संख्या दर्ज की गई थी।

अधिकारियों ने बताया कि इस क्षेत्र में बड़ी संख्या में लोग यमुना तट क्षेत्र के आसपास कृषि गतिविधियों से जुड़े हुए थे।

बयान में कहा गया कि ईआरओ कार्यालय के अनुसार, इन कृषि गतिविधियों को ‘अवैध खेती’ के रूप में चिह्नित किया गया था और वर्ष 2021 में इन्हें बंद कर दिया गया। वहीं, क्षेत्र में बने आवासीय ढांचों को 2022-23 में ध्वस्त कर दिया गया।

बयान में कहा गया, ‘‘इसके परिणामस्वरूप पुराने चुनावी रिकॉर्ड तैयार किए जाने के बाद से क्षेत्र की भौतिक और आवासीय स्थिति में बड़ा बदलाव आया है।’’

ईआरओ कार्यालय ने बताया कि एसआईआर के दौरान बूथ स्तर के अधिकारियों (बीएलओ) को मतदाताओं के पंजीकृत पते पर घर-घर जाकर गणना प्रपत्र वितरित करने और बाद में उन्हें एकत्र करने का निर्देश दिया गया था।

बेला एस्टेट के मामले में, आवासीय ढांचे ध्वस्त होने के कारण मतदाता अब मतदाता सूची में दर्ज पते पर नहीं रह रहे थे।

ईआरओ कार्यालय ने कहा कि ऐसे में उनका ‘‘सामान्य निवासी’’ का दर्जा बदल गया और बीएलओ ने उन्हें सही तरीके से ‘‘अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत या डुप्लिकेट’’ (एएसडीडी) सूची में शामिल किया।

मतदाता सूची से नाम हटने का अर्थ यह नहीं है कि पात्र व्यक्ति दोबारा नाम जुड़वाने के लिए आवेदन नहीं कर सकता। जिस व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में नहीं है, लेकिन वह पात्रता शर्तें पूरी करता है, वह भारत निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित दस्तावेजों के साथ फॉर्म-6 के जरिए नाम शामिल कराने के लिए आवेदन कर सकता है।

दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की अंतिम तारीख 30 सितंबर है, जबकि अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन 4 नवंबर को किया जाएगा।

भाषा

मनीषा वैभव

वैभव