कोलकाता, 23 सिंतबर (भाषा) पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम विधानसभा सीट का उपचुनाव कानूनी विवादों में घिर गया है। कलकत्ता उच्च न्यायालय में बृहस्पतिवार को एक और याचिका पर सुनवाई होगी, जिसमें भाजपा प्रत्याशी हसीरानी रथ द्वारा बताई गई उम्र और स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के वर्ष में विसंगति होने का आरोप लगाया गया है।
वकील आर. घोषाल ने न्यायमूर्ति कृष्ण राव के समक्ष कहा कि रथ के हलफनामे में उनकी उम्र 60 वर्ष से अधिक बताई गई है, जबकि उन्होंने 10वीं कक्षा की पढ़ाई पूरी करने का वर्ष 1965 बताया है। उन्होंने कहा कि इससे उनकी उम्र और शैक्षणिक योग्यता हासिल करने के समय को लेकर ‘‘विसंगति’’ सामने आती है।
न्यायमूर्ति राव ने घोषाल को याचिका दायर करने की अनुमति दे दी और निर्देश दिया कि मामले पर बृहस्पतिवार को सुनवाई होगी।
उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि इस बीच दूसरे पक्ष को नोटिस दिया जाए।
घोषाल ने कहा कि जमा किए गए दस्तावेजों का सत्यापन करना निर्वाचन आयोग के अधिकारियों का दायित्व है।
उन्होंने अदालत से नंदीग्राम विधानसभा सीट पर छह अक्टूबर को होने वाले उपचुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) प्रत्याशी द्वारा जमा किए गए दस्तावेजों की जांच कराने का आदेश देने का अनुरोध किया।
न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की एक अन्य एकल पीठ गिरफ्तार कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान की हिरासत को लेकर बृहस्पतिवार को सुनवाई करेगी।
प्रधान के वकील ने दावा किया कि नंदीग्राम में 2007 के भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन के दौरान दर्ज मामलों के सिलसिले में उन्हें 18 सितंबर को तभी गिरफ्तार किया गया, जब उपचुनाव के लिए कांग्रेस प्रत्याशी को ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) गुट का समर्थन मिला।
अभियोजन पक्ष ने कहा कि किसी इलाके में चुनाव होने पर निर्वाचन आयोग के दिशानिर्देश के तहत मतदान से पहले सभी गिरफ्तारी वारंट पर अमल करना संबंधित पुलिस अधिकारियों की जिम्मेदारी है।
राज्य सरकार के वकील ने मंगलवार को उच्च न्यायालय में बताया था कि प्रधान के खिलाफ 11 आपराधिक मामले दर्ज हैं।
उन्होंने यह भी कहा था कि कांग्रेस प्रत्याशी को पांच मामलों में न्यायिक हिरासत में भेजा गया है।
राज्य सरकार के वकील ने बताया कि जिन छह अन्य आपराधिक मामलों में प्रधान ने संरक्षण मांगा था, उनमें से पांच को पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार ने बंद कर दिया था और एक अन्य मामले में प्रधान की जरूरत नहीं थी।
हालांकि, उनके वकील ने बताया कि प्रधान को हत्या और अन्य आरोपों से जुड़े एक अन्य आपराधिक मामले में गिरफ्तार दिखाया गया और छह अक्टूबर को होने वाले मतदान के एक दिन बाद, सात अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
भाषा तान्या अविनाश
अविनाश