महाराजा हरि सिंह, शेख अब्दुल्ला की जयंती पर अवकाश के मुद्दे पर नेकां और भाजपा सदस्य आमने-सामने
महाराजा हरि सिंह, शेख अब्दुल्ला की जयंती पर अवकाश के मुद्दे पर नेकां और भाजपा सदस्य आमने-सामने
(फोटो के साथ)
श्रीनगर, 22 सितंबर (भाषा) जम्मू-कश्मीर विधानसभा में मंगलवार को तब हंगामा हुआ, जब सत्तारूढ़ नेशनल कांफ्रेंस (नेकां) के एक विधायक ने मांग की कि या तो पार्टी संस्थापक शेख मोहम्मद अब्दुल्ला की जयंती पर छुट्टी बहाल की जाए या फिर महाराजा हरि सिंह की जयंती पर छुट्टी रद्द कर दी जाए।
सदन की कार्यवाही शुरू होते ही नेशनल कांफ्रेंस के विधायक अब्दुल मजीद लारमी ने यह मांग रखी। हालांकि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायकों ने इसका विरोध किया, जिससे सदन में हंगामा हो गया।
भाजपा विधायक देवयानी राणा ने कहा कि महाराजा हरि सिंह की जयंती पर छुट्टी रद्द नहीं की जाएगी।
शेख मोहम्मद अब्दुल्ला की जयंती पर छुट्टी की मांग का समर्थन करते हुए नेकां विधायक नजीर गुरेजी ने कहा कि नेकां संस्थापक जननेता थे।
भाजपा सदस्यों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। तब विधानसभा अध्यक्ष अब्दुल रहीम राथर ने उनसे सवाल किया कि अगर लारमी ने सदन में अपनी बात रखी है, तो वे विरोध क्यों कर रहे हैं।
विधानसभा अध्यक्ष ने भाजपा विधायकों से कहा कि वे विरोध न करें और अपनी सीट पर बैठ जाएं।
नेकां के मुख्य सचेतक मुबारक गुल ने कहा कि अब्दुल्ला की जयंती पर छुट्टी की मांग पार्टी का रुख है। उन्होंने कहा, ‘‘नेशनल कांफ्रेंस की सरकार कई सालों तक रही, लेकिन हमने कोई नाम नहीं बदला और न ही छुट्टियां रद्द कीं।’’
पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) ने भी अब्दुल्ला की जयंती पर छुट्टी की मांग का समर्थन किया। हालांकि, पीडीपी विधायक वहीद पारा ने कहा कि पार्टी यह भी चाहती है कि महाराजा के शासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि के तौर पर 13 जुलाई की छुट्टी फिर से बहाल हो। नेकां विधायकों ने भी पारा की मांग का समर्थन किया।
हंगामा जारी रहने के बीच, भाजपा विधायक सुरजीत सिंह सलाथिया ने कहा कि उनकी पार्टी चाहती है कि सदन चले। उन्होंने विपक्ष द्वारा उठाए गए मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगा।
कांग्रेस विधायक निजामुद्दीन भट ने कहा कि ‘उपद्रव’ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और छुट्टी के मुद्दे पर आम सहमति होनी चाहिए। अध्यक्ष ने कहा कि विधानसभा में हंगामा करने से यह मुद्दा हल नहीं होगा।
उन्होंने कहा, ‘‘अगर सदन इस पर चर्चा करना चाहता है, तो मैं कुछ समय दूंगा, लेकिन अभी नहीं। सदन की कार्यवाही में बाधा न डालें।’’
अध्यक्ष ने कहा कि अगर मुद्दे उठाने हैं, तो इसके लिए नियम हैं और हमें कामकाज की सूची के अनुसार ही काम करना होगा। राथर ने कहा, ‘‘सरकार को नोटिस मिलना चाहिए ताकि वह जवाब दे सके।’’
इससे भाजपा सदस्य भड़क गए और उन्होंने ‘‘निकम्मी सरकार हाय-हाय’’ के नारे लगाते हुए सदन से बहिर्गमन किया।
हालांकि, भाजपा के एक विधायक विक्रम रंधावा सदन में मौजूद रहे क्योंकि जब मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला उनके द्वारा पूछे गए सवाल का जवाब दे रहे थे।
मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘मैं इन विधायक को सलाम करता हूं जो अपनी पार्टी के सभी विधायकों के चले जाने के बावजूद सदन में बैठे रहे। वह जनहित में यहां बैठे रहे। इससे एक सच्चे विधायक और नकली विधायक के बीच का अंतर पता चलता है।’’
हालांकि, संबंधित विधायक ने कहा कि बहिर्गमन के बाद वह सदन में ‘‘सिर्फ़ मुख्यमंत्री का जवाब सुनने के लिए’’ वापस आए थे।
भाषा राजकुमार अमित
अमित

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