पाठ्यपुस्तक पर न्यायालय की फटकार के बाद एनसीईआरटी ने पाठ्यक्रम समिति में बदलाव किया

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पाठ्यपुस्तक पर न्यायालय की फटकार के बाद एनसीईआरटी ने पाठ्यक्रम समिति में बदलाव किया

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  • Publish Date - April 8, 2026 / 03:37 PM IST,
    Updated On - April 8, 2026 / 03:37 PM IST

नयी दिल्ली, आठ अप्रैल (भाषा) कक्षा आठवीं की सामाजिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तक में ‘‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’’ से संबंधित एक खंड को लेकर उच्चतम न्यायालय की फटकार के बाद राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने अपनी पाठ्यक्रम समिति का पुनर्गठन किया है। अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी।

एनसीईआरटी की उच्च स्तरीय 20-सदस्यीय राष्ट्रीय पाठ्यक्रम और पठन-पाठन सामग्री समिति (एनएसटीसी) में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मद्रास के निदेशक वी कामकोटी; भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद के अध्यक्ष रघुवेन्द्र तंवर; ‘नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी’ के पूर्व कुलपति आर वेंकट राव और केंद्रीय शैक्षिक प्रौद्योगिकी संस्थान, एनसीईआरटी के संयुक्त निदेशक-प्रभारी अमरेन्द्र प्रसाद बेहेरा शामिल हैं।

पहले इस समिति में 22 सदस्य थे।

उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद, एनएसटीसी से तीन सदस्यों को हटा दिया गया है। इनमें आईआईटी गांधीनगर के पूर्व अतिथि प्रोफेसर मिशेल डैनिनो, चेन्नई स्थित ‘सेंटर फॉर पॉलिसी स्टडीज’ के अध्यक्ष एम डी श्रीनिवास और प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के पूर्व अध्यक्ष दिवंगत बिबेक देबरॉय शामिल हैं।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि एनएसटीसी को आवश्यक बदलाव के माध्यम से मजबूत बनाने के लिए इसका पुनर्गठन किया गया है।

समिति को स्कूल के पाठ्यक्रम और पठन-पाठन सामग्री विकसित करने का अधिकार है, जिसमें तीसरी कक्षा से 12वीं तक की पाठ्यपुस्तकें शामिल हैं और यदि आवश्यक हो, तो पहली कक्षा और दूसरी की मौजूदा पाठ्यपुस्तकों को उचित रूप से संशोधित करने का भी अधिकार है ताकि कक्षा दूसरी से तीसरी में सुचारू रूप से बदलाव सुनिश्चित हो सके।

फरवरी में, उच्चतम न्यायालय ने कक्षा आठवीं की सामाजिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तक का स्वतः संज्ञान लिया था, जिसमें ‘‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’’ नामक एक खंड था। बाद में अदालत ने उक्त पाठ्यपुस्तक की भौतिक या ऑनलाइन प्रतियों के इस्तेमाल पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया।

भाषा आशीष सुरभि

सुरभि