नयी दिल्ली, 10 जून (भाषा) राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) ने जेल के लिए एक वैधानिक राष्ट्रीय आयोग बनाने की सिफारिश की है। उसने महिला कैदियों के अधिकारों और कल्याण पर खास ध्यान देते हुए लैंगिक रूप से संवेदनशील सुधार तंत्र बनाने के लिए व्यापक कानूनी सुधारों का सुझाव दिया है।
ये सिफारिशें जेल में महिला कैदियों से जुड़े कानूनों पर आयोग की ‘कानून समीक्षा रिपोर्ट 2025-26’ का हिस्सा हैं, जिसे विचार के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय और महिला एवं बाल विकास मंत्रालय को सौंपा गया है।
आयोग ने बुधवार को एक बयान में कहा, “अध्यक्ष विजया रहाटकर के नेतृत्व में एनसीडब्ल्यू ने जेल में महिला कैदियों से जुड़े कानूनों की समीक्षा (2025-26) पर आधारित अपनी सिफारिशों वाली रिपोर्ट सौंपी है। इसमें देशभर में लैंगिक रूप से संवेदनशील, मानवीय और अधिकारों पर आधारित सुधार तंत्र बनाने के लिए व्यापक सुधारों का सुझाव दिया गया है।”
बयान के मुताबिक, रिपोर्ट में आदर्श जेल और सुधार सेवा अधिनियम, 2023; जेल अधिनियम, 1894; आदर्श जेल नियमावली, 2016; कैदियों की स्वदेश वापसी अधिनियम, 2003; भारतीय न्याय संहिता, 2023; भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023; मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम, 2017; एचआईवी और एड्स (रोकथाम एवं नियंत्रण) अधनियम, 2017; और ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019 समेत कई कानूनों में बदलाव की सिफारिश की गई है।
आयोग ने बताया कि रिपोर्ट में एक अहम सिफारिश जेल प्रशासन की निगरानी, कैदियों के अधिकारों की सुरक्षा, सुधारवादी कदमों की देखरेख और देशभर की जेल में जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए एक स्वतंत्र ‘राष्ट्रीय जेल आयोग’ बनाने के संबंध में की गई है, जिसमें महिला कैदियों की जरूरतों और अधिकारों पर खास ध्यान दिया जाएगा।
एनसीडब्ल्यू के अनुसार, यह रिपोर्ट जेल प्रशासकों, न्यायिक अधिकारियों, कानूनी विशेषज्ञों, पुलिस अधिकारियों, शिक्षाविदों और नागरिक समाज संगठनों के साथ व्यापक विचार-विमर्श की प्रक्रिया के बाद तैयार की गई है।
आयोग ने बताया कि विचार-विमर्श की प्रक्रिया के दौरान 200 से ज्यादा सुझाव हासिल हुए, जिनमें से 145 को विस्तार से विचार और अंतिम रिपोर्ट में शामिल करने के लिए चुना गया।
भाषा पारुल प्रशांत
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