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रांची, 18 जून (भाषा) झारखंड में बृहस्पतिवार को राज्यसभा की दो सीटों के लिए हुए चुनाव में एक सीट पर ‘क्रॉस-वोटिंग’ के बीच राजग समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी ने कांग्रेस प्रत्याशी प्रणव झा को हरा दिया। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी।
दूसरी सीट से सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के उम्मीदवार बैद्यनाथ राम निर्वाचित हुए।
अधिकारी ने बताया कि नाथवानी को 28 वोट मिले, जिसके बाद उन्हें विजेता घोषित किया गया। झा को 20 वोट हासिल हुए।
अधिकारी के अनुसार राम को चुनाव में 30 वोट मिले, जबकि तीन वोट – भाजपा के दो और कांग्रेस का एक अमान्य पाए गए।
विधानसभा में भाजपा नीत राजग के विधायकों की संख्या 24 है, जो राज्यसभा की एक सीट पर जीत सुनिश्चित करने के लिए 81 सदस्यीय विधानसभा में आवश्यक 28 प्रथम वरीयता मतों से चार कम है।
झामुमो और कांग्रेस के सत्तारूढ़ ‘इंडिया’ गठबंधन के सदन में 56 सदस्य हैं।
नाथवानी की जीत के तुरंत बाद कांग्रेस ने भाजपा पर तीखा हमला बोला और आरोप लगाया कि उसने झारखंड में विधायकों की खरीद-फरोख्त को बढ़ावा दिया।
कांग्रेस की मंत्री दीपिका पांडे सिंह ने कहा, “भाजपा ने एक कॉर्पोरेट व्यक्ति को निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतारा और पैसे के दम पर चुनाव जीता। भाजपा विधायकों की खरीद-फरोख्त को बढ़ावा दे रही है। हालांकि हमें खुशी है कि कांग्रेस के सभी विधायक एकजुट रहे और उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार के पक्ष में मतदान किया।”
चुनाव में पोलिंग एजेंट रहे झारखंड कांग्रेस के प्रभारी के. राजू ने हार के लिए सहयोगी दलों राष्ट्रीय जनता दल और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्कस्वादी-लेनिनवादी) लिबरेशन को जिम्मेदार ठहराया।
उन्होंने पत्रकारों से कहा, “राजद और भाकपा माले लिबरेशन ने हमें धोखा दिया। उन्होंने हमें वोट नहीं दिया और इसी वजह से हम हार गए। हमें झामुमो के चार वोट मिले और कांग्रेस के सभी विधायकों ने हमारे उम्मीदवार के पक्ष में मतदान किया।”
जब उनसे पूछा गया कि क्या इस नतीजे का गठबंधन पर असर पड़ेगा, तो उन्होंने कहा कि वह इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के साथ चर्चा करेंगे।
झारखंड भाजपा के अध्यक्ष आदित्य साहू ने नाथवानी को बधाई दी और कहा कि विधायकों ने अपनी अंतरात्मा की आवाज के अनुसार मतदान किया।
उन्होंने कहा, “हमारे दो वोट अमान्य होने के बावजूद नाथवानी को 28 वोट मिले। यह बड़ी जीत है। इंडिया गठबंधन के कुछ सदस्यों ने भी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में हो रहे विकास कार्यों पर भरोसा जताया है।”
उन्होंने विधायकों की खरीद-फरोख्त के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि विधायकों ने अपनी अंतरात्मा के अनुसार वोट डाला।
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा कि झारखंड के मतदाता, खासकर भाजपा विधायक, समझदार हैं और वे जानते हैं कि राज्य के व्यापक हित में किसे वोट देना चाहिए।
पूर्व मुख्यमंत्री मरांडी ने कहा, “नाथवानी 2008 से 2020 तक दो बार झारखंड से राज्यसभा सांसद रह चुके हैं। लोगों ने उनका काम देखा है। उन्हें फिर से झारखंड की सेवा करने का मौका मिला है और इसका लाभ लोगों को मिलेगा।”
एक अन्य पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता चंपई सोरेन ने विश्वास जताया कि नाथवानी केंद्र सरकार की कल्याणकारी योजनाओं को झारखंड के लोगों तक पहुंचाने में सकारात्मक भूमिका निभाएंगे।
मतदान से पहले सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों ने अपने विधायकों को एकजुट रखने के लिए पूरी कोशिश की।
राजग के विधायकों को मंगलवार को रांची के एक होटल में ठहराया गया था, जबकि सत्तारूढ़ ‘इंडिया’ गठबंधन ने ‘क्रॉस-वोटिंग’ की आशंका को रोकने के लिए अपने विधायकों के साथ बैठकें की थीं।
भाषा जोहेब नरेश
नरेश