नयी दिल्ली, 29 जनवरी (भाषा) वर्ष 2025-26 की आर्थिक समीक्षा में कहा गया है कि इस बात की जरूरत है कि आठवीं कक्षा के बाद भी बच्चे पढ़ाई जारी रखें क्योंकि माध्यमिक शिक्षा के स्तर पर उम्र के हिसाब से पंजीकरण का स्तर कम है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा बृहस्पतिवार को संसद में पेश की गई आर्थिक समीक्षा के अनुसार, भारत में प्रारंभिक स्तर पर बच्चों के स्कूलों में पंजीकरण की दर में सुधार किया है, वहीं माध्यमिक स्तर पर आयु के हिसाब से सकल पंजीकरण दर 52.2 प्रतिशत के निम्न स्तर पर बनी हुई है।
इसमें कहा गया है कि यह स्थिति बच्चों को कक्षा आठ के बाद भी स्कूलों में अध्ययनरत बनाए रखने की जरूरत को उजागर करती है।
इसमें कहा गया है, ‘‘एक मुख्य मुद्दा स्कूलों का असमान वितरण है क्योंकि 54 प्रतिशत स्कूल केवल बुनियादी-आरंभिक शिक्षा प्रदान करते हैं, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में केवल 17.1 प्रतिशत विद्यालय माध्यमिक शिक्षा प्रदान करते हैं।’’
इसमें कहा गया है कि शहरी क्षेत्रों में माध्यमिक स्कूलों की हिस्सेदारी ज्यादा (38.1 प्रतिशत) है। आर्थिक सर्वेक्षण में इस असमानता पर जोर दिया गया है, जो ग्रामीण छात्रों की उच्च-स्तरीय कक्षाओं तक पहुंच को सीमित करती है, जिसके परिणामस्वरूप ‘ड्रॉपआउट’ (बच्चों के पढ़ाई छोड़ने की) दर बढ़ती है।
इसमें यह भी कहा गया है कि भारत ने अवसंरचना और शिक्षकों की क्षमता को मजबूत करके स्कूलों में बच्चों के प्रवेश में उल्लेखनीय प्रगति की है, जिसमें पोषण शक्ति निर्माण और समग्र शिक्षा अभियान जैसी योजनाएं पहुंच और समानता को बढ़ावा दे रही हैं।
इसमें कहा गया है, ‘‘आगे कार्रवाई की जरूरत है, खासकर जब ध्यान पंजीकरण से हटकर सीखने के परिणामों पर जा रहा है। समग्र और एकीकृत स्कूलों का विस्तार करने, स्कूलों को कक्षा 7 तक उन्नत करने और ‘ओपन स्कूलिंग’ (मुक्त शिक्षण) को मजबूत करने के लिए नीतिगत हस्तक्षेप महत्वपूर्ण हैं।’’
भाषा वैभव माधव
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