साइबर अपराधियों का नया ‘बॉस’ घोटाला, अंतरराष्ट्रीय गिरोह बेनकाब

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साइबर अपराधियों का नया 'बॉस' घोटाला, अंतरराष्ट्रीय गिरोह बेनकाब

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  • Publish Date - August 18, 2026 / 07:26 PM IST,
    Updated On - August 18, 2026 / 07:26 PM IST

अहमदाबाद, 18 अगस्त (भाषा) अहमदाबाद की अपराध शाखा ने व्हाट्सएप धोखाधड़ी मामले से जुड़ी जांच में एक ऐसे साइबर अपराध नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है जिसके तार चीन, पाकिस्तान, भारत और हांगकांग तक फैले हुए थे तथा पश्चिम बंगाल से दो प्रमुख सिम-ओटीपी आपूर्तिकर्ताओं को गिरफ्तार किया है।

इस मामले में अपराध शाखा ने ‘बॉस घोटाले’ का शिकार होने के जोखिम से 10,000 से अधिक उपकरणों को बचा लिया।

साइबर अपराध शाखा द्वारा मंगलवार को जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार, तकनीकी विश्लेषण के जरिए पश्चिम बंगाल से गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान इमरान अली पियादा और इंजाम्मुल मुल्ला के रूप में हुई है।

‘बॉस’ घोटाला, जिसे ‘सीईओ’ प्रतिरूपण धोखाधड़ी के रूप में भी जाना जाता है, साइबर ठगी का एक बेहद शातिर तरीका है। इसमें अपराधी किसी कंपनी का अधिकारी या भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) या भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) जैसे नियामक निकायों के अधिकारी के रूप में खुद को पेश करते या दावा करते हैं, ताकि कर्मचारियों को बड़ी रकम स्थानांतरित करने या कंपनी की संवेदनशील जानकारी साझा करने के लिए धोखा दिया जा सके।

जांच तब शुरू हुई जब अहमदाबाद के एक व्यवसायी से व्हाट्सएप-आधारित धोखाधड़ी के जरिए 1.5 करोड़ रुपये की ठगी की गई। जालसाजों ने शुरुआत में खुद को आरबीआई का अधिकारी बताया और बाद में पीड़ित की कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों का रूप धारण कर लिया।

एक अज्ञात व्यक्ति ने 23 जून को व्हाट्सएप के जरिए पीड़ित के मोबाइल नंबर पर एक ‘ज़िप’ फाइल भेजी, जिसमें दावा किया गया कि कंपनी के बैंक खाते में ‘असामान्य लेनदेन गतिविधियां’ हुई हैं और आरबीआई के जोखिम नियंत्रण विभाग द्वारा प्रतिबंध या निलंबन की चेतावनी दी गई।

साइबर अपराध शाखा के अनुसार, इसके बाद कंपनी के मालिक का रूप धारण करने वाले जालसाजों ने कंपनी के अकाउंटेंट को एक बैंक खाते में 1.5 करोड़ रुपये स्थानांतरित करने का निर्देश दिया।

अधिकारियों ने बताया कि शिकायतकर्ता ने साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 के माध्यम से इस धोखाधड़ी की सूचना दी, जिसके बाद ठगे गए 1.5 करोड़ रुपये में से 1.13 करोड़ रुपये बरामद कर लिए गए।

मोबाइल फोन नंबरों के तकनीकी विश्लेषण के आधार पर, पुलिस ने पश्चिम बंगाल में दोनों आरोपियों का सुराग लगाकर उन्हें पकड़ लिया।

पुलिस के मुताबिक, सिम-रीचार्ज विक्रेता पियादा ने कथित तौर पर ग्राहकों के बायोमेट्रिक फिंगरप्रिंट का दुरुपयोग करके सिम कार्ड हासिल किए और बाद में उनकी जानकारी के बिना फर्जी सिम कार्ड पर नंबर सक्रिय कर दिए।

उसने कथित तौर पर इन नंबरों और व्हाट्सएप खातों की आपूर्ति साइबर अपराधियों को की और खातों को सक्रिय करने के लिए आवश्यक ओटीपी प्रदान किए।

पुलिस ने बताया कि पियादा ने पांच वर्षों में ई-कॉमर्स और ऑनलाइन गेमिंग ऐप के लिए लगभग 21,000 ओटीपी बेचे, जिससे उसने 21 लाख रुपये से अधिक कमाए। उसने व्हाट्सएप खातों को सक्रिय करने के लिए इस्तेमाल किए गए लगभग 900 ओटीपी भी बेचे, जिससे 2.25 लाख रुपये से अधिक की कमाई हुई।

दूसरे आरोपी इंजाम्मुल मुल्ला ने कथित तौर पर साइबर धोखाधड़ी में शामिल लोगों के साथ तालमेल बिठाया और अपराधों में इस्तेमाल होने वाले मोबाइल नंबर, फर्जी सिम कार्ड और व्हाट्सएप-आधारित संचार प्रणाली प्रदान करने में मदद की।

साइबर अपराध शाखा ने कहा कि इस जोड़ी द्वारा साइबर अपराधियों को कथित तौर पर आपूर्ति किए गए लगभग 4,500 मोबाइल सिम कार्डों के संबंध में 26 राज्यों में राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) पर 252 शिकायतें दर्ज की गई थीं।

इनमें 194 ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी की शिकायतें और तीन बॉस धोखाधड़ी की शिकायतें शामिल थीं, साथ ही सोशल मीडिया, हैकिंग और अन्य साइबर अपराधों से संबंधित मामले भी शामिल थे।

पुलिस ने कहा कि इस ऑपरेशन ने ‘साइबर क्राइम एज़ ए सर्विस’ (एक सेवा के रूप में साइबर अपराध) के उभरने को भी उजागर किया है, जहां व्हाट्सएप सहित ऑनलाइन मंचों पर समूहों और लिंक का उपयोग साइबर अपराधों के लिए आवश्यक ओटीपी और अन्य डिजिटल संसाधनों को खुले तौर पर खरीदने और बेचने के लिए किया जाता है।

भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी) और अहमदाबाद साइबर अपराध शाखा के तकनीकी व नेटवर्क विश्लेषण से संकेत मिला है कि बॉस घोटाले के लिए उपयोग किया गया मैलवेयर (वायरस) चीन से जुड़े साइबर अपराधियों द्वारा विकसित किए जाने का संदेह है और इसका उपयोग इस्लामाबाद में एक कॉल सेंटर के माध्यम से भारतीयों को निशाना बनाने के लिए किया गया था।

धोखाधड़ी से जुड़े बैंक खातों तक कथित तौर पर चीन-आधारित वीपीएन (आभासी निजी नेटवर्क) सेवा के माध्यम से पहुंच बनाई गई थी, जबकि जांच में प्रारंभिक रूप से शामिल लोगों की पहचान और स्थानों को छिपाने के लिए चीन, भारत, पाकिस्तान और हांगकांग से जुड़े साइबर बुनियादी ढांचे के उपयोग का संकेत मिला है।

पुलिस ने कहा कि समन्वित कार्रवाई से ‘बॉस घोटाले’ के हमलों का शिकार होने वाले संभावित 10,000 से अधिक उपकरणों को सुरक्षित करने और करोड़ों रुपये के संभावित नुकसान को रोकने में मदद मिली।

उन्होंने बताया कि ‘सहयोग पोर्टल’ के जरिए पहचाने गए मैलवेयर को भी नियमित रूप से ब्लॉक किया जा रहा है।

इस घोटाले में काम करने का तरीका यह था कि आरबीआई या सरकारी अधिकारियों का स्वांग रचते हुए कंपनी के अधिकारियों को .ईएक्सई और .डीएलएल फाइलों वाली एक मैलिशियस (हानिकारक) जिप फाइल भेजी जाती थी।

जैसे ही कंप्यूटर पर व्हाट्सएप वेब के जरिए यह फाइल खोली गई, हैकरों ने व्हाट्सएप का पूरा अधिकार अपने हाथ में ले लिया। इसके बाद उन्होंने कंपनी के मालिक (सीईओ या निदेशक) के रूप में खुद को पेश किया और वित्त विभाग के कर्मचारियों को तुरंत पैसे भेजने का निर्देश दे दिया।

पुलिस ने सात मोबाइल फोन और एक राउटर जब्त किया है, जिसकी कुल अनुमानित कीमत 19,500 रुपये है। विज्ञप्ति में कहा गया है कि अन्य संदिग्धों और डिजिटल साक्ष्यों की पहचान करने के लिए उपकरणों की तकनीकी जांच जारी है।

भाषा सुमित माधव

माधव