वायनाड (केरल), 20 फरवरी (भाषा) पेशे से दर्जी सैदलवी उस समय भावुक हो गए जब 2024 के चूरालमाला-मुंडक्कई भूस्खलन के पीड़ितों को स्थायी घर आवंटित करने के लिए आयोजित लॉटरी में उनका नाम पुकारा गया। इस भूस्खलन में वायनाड में कम से कम 226 लोगों की जान चली गई थी और सैकड़ों लोग विस्थापित हो गए थे।
जिला प्रशासन ने शुक्रवार को मेप्पडी में लॉटरी निकालकर कलपेट्टा के पास मॉडल टाउनशिप परियोजना के तहत निर्मित घरों के लिए 178 लाभार्थियों के पहले बैच का चयन किया।
सैदलवी ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘‘मैं एक दर्जी हूं और चूरालमाला में मेरी एक कपड़ा बनाने की फैक्टरी थी, जो भूस्खलन में नष्ट हो गई। मुझे रहने के लिए घर मिल गया है, इससे मैं खुश हूं।’’
उन्होंने कहा कि उनकी चिंता अपने परिवार के लिए आय का स्रोत ढूंढना है।
सैदलवी ने कहा, ‘‘मेरी दुकान नष्ट हो गई है और सरकार को मेरी मदद करनी चाहिए ताकि मैं अपनी आजीविका फिर से शुरू कर सकूं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘मेरी दो मंजिला दुकान थी और अभी वैसी ही दुकान दोबारा बनाना संभव नहीं है। घर मिलने के बाद, सरकार से मिलने वाली मासिक सहायता बंद हो सकती है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘मैं केवल दुकान दोबारा शुरू करने के लिए सहायता या नष्ट हुई दुकान के लिए मुआवजा चाहता हूं।’’
लॉटरी के माध्यम से चुने गए 178 लाभार्थियों को 25 फरवरी को एक समारोह में घरों की चाबियां सौंपी जाएंगी।
पूर्व में कलपेट्टा में एल्स्टन एस्टेट का हिस्सा रहे इस भूखंड पर विकसित मॉडल टाउनशिप परियोजना के तहत सात सेंट भूमि पर कुल 410 घर बनाए गए हैं।
प्रत्येक घर 1,000 वर्ग फुट में फैला है और इसमें दो शयनकक्ष, एक बैठक कक्ष, एक अध्ययन कक्ष, एक भोजन कक्ष, एक रसोईघर और एक भंडार कक्ष है।
इस टाउनशिप में एक स्वास्थ्य केंद्र, एक आंगनवाड़ी, एक सार्वजनिक बाजार और एक सामुदायिक केंद्र भी शामिल हैं।
वायनाड की जिलाधिकारी डॉ. मेघाश्री ने इसे जिला प्रशासन के लिए एक ‘‘महत्वपूर्ण उपलब्धि’’ बताया।
उन्होंने कहा, ‘‘लाभार्थियों के पहले बैच की चाबियां मुख्यमंत्री पिनराई विजयन 25 फरवरी की शाम को सौंपेंगे। जिला प्रशासन ने इसे हासिल करने के लिए काफी प्रयास किए हैं और सरकार के समय पर दिए गए निर्देशों ने हमें इस मुकाम तक पहुंचने में मदद की है।’’
अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री ओ आर केलू की उपस्थिति में मेप्पडी स्थित एमएसए सभागार में लॉटरी निकाली गई।
भूस्खलन में अपना घर खो चुकीं एक अन्य लाभार्थी सूर्यलता ने कहा कि उनका लंबा इंतजार आखिरकार खत्म हो गया।
उन्होंने कहा, ‘‘हम कई साल से इस पल का इंतजार कर रहे थे। घर पाकर हम बहुत खुश हैं।’’
भाषा सुरभि रंजन
रंजन