वाराणसी में गंगा की सहायक नदी के दोहन को लेकर एनजीटी ने एनएमसीजी से स्पष्टीकरण मांगा

वाराणसी में गंगा की सहायक नदी के दोहन को लेकर एनजीटी ने एनएमसीजी से स्पष्टीकरण मांगा

वाराणसी में गंगा की सहायक नदी के दोहन को लेकर एनजीटी ने एनएमसीजी से स्पष्टीकरण मांगा
Modified Date: February 10, 2026 / 06:52 pm IST
Published Date: February 10, 2026 6:52 pm IST

नयी दिल्ली, 10 फरवरी (भाषा) राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने वाराणसी में गंगा नदी की एक सहायक नदी का दोहन करके नियमों का उल्लंघन करने के लिए राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) से स्पष्टीकरण मांगा है।

एनजीटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य ए सेंथिल वेल की पीठ नदी में घरेलू सीवेज और अनुपचारित औद्योगिक जल को छोड़े जाने के संबंध में अधिवक्ता सौरभ तिवारी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी।

पीठ ने पांच फरवरी के एक आदेश में कहा कि उत्तर प्रदेश ने वाराणसी में गंगा नदी और उसकी सहायक नदियों में सीवेज और औद्योगिक अपशिष्ट के निर्वहन से होने वाले प्रदूषण के शमन और नियंत्रण के लिए योजना की एक प्रति प्रस्तुत की थी।

योजना में वाराणसी और चंदौली में गंगा और वरुणा नदी में मिलने वाले आंशिक रूप से दोहित या अब तक दोहन न किए गए नालों की स्थिति का विवरण दिया गया है। इस पर टिप्पणी करते हुए अधिकरण ने कहा कि असी नदी को एक नाले के रूप में उल्लेखित किया गया है।

इसमें कहा गया है, ‘इस बात में कोई विवाद नहीं है कि असी नदी गंगा नदी की सहायक नदी है, और गंगा नदी (पुनरुद्धार, संरक्षण और प्रबंधन) प्राधिकरण आदेश, 2016 के अनुसार, इस तरह के दोहन की अनुमति नहीं दी जा सकती।’

एनजीटी ने कहा ‘राज्य के वकील ने यह बताया है कि एनएमसीजी द्वारा असी नदी के दोहन की अनुमति दी गई है। एनएमसीजी को यह स्पष्टीकरण देना होगा कि 2016 के आदेश के प्रावधानों का उल्लंघन करते हुए गंगा नदी की सहायक नदी के दोहन की अनुमति कैसे दी गई।’

अधिकरण ने राज्य को वाराणसी में सभी घरों को सीवेज नेटवर्क से 100 प्रतिशत जोड़ने के लिए एक समयसीमा प्रदान करने का भी निर्देश दिया।

राज्य और एनएमसीजी को प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए छह सप्ताह का समय देते हुए एनजीसी ने मामले की आगे की कार्यवाही के लिए 21 अप्रैल की तारीख तय की।

भाषा

नोमान नरेश

नरेश


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