एनजीटी ने भूजल के अपव्यय पर केंद्र की खिंचाई की

एनजीटी ने भूजल के अपव्यय पर केंद्र की खिंचाई की

एनजीटी ने भूजल के अपव्यय पर केंद्र की खिंचाई की
Modified Date: November 29, 2022 / 08:53 pm IST
Published Date: October 23, 2020 10:57 am IST

नयी दिल्ली, 23 अक्टूबर (भाषा) राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने भूजल के अपव्यय एवं दुरूपयोग को रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाने को लेकर केंद्र की खिंचाई की है और कहा है कि इस संबंध में विशिष्ट समयबद्ध कार्ययोजना एवं निगरानी होनी चाहिए।

एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल की अगुवाई वाली पीठ ने कहा कि जलशक्ति मंत्रालय एवं दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) के जवाबों में ऐसे अपव्यय एवं दुरूपयोग को रोकने के लिए स्पष्ट लागू करने योग्य नीति नजर नहीं आती है।

पीठ ने कहा, ‘‘ हलफनामा अस्पष्ट और सामान्य है। यह कहा गया है कि राज्यों को पत्र लिखे गये हैं। यह कदम जलशक्ति मंत्रालय पर जनता के विश्वास पर खरा उतरने के लिए काफी नहीं है।’’

उसने कहा, ‘‘ पत्र लिखने के अलावा इस संबंध में विशिष्ट समयबद्ध कार्ययोजना एवं निगरानी होनी चाहिए जिनमें लागू करने के लिए बाध्यकारी उपाय शामिल हों।’’

एनजीटी ने कहा कि डीजेबी का हलफनामा तो इस समस्या के समाधान के लिए बिल्कुल अपर्याप्त है।

उसने कहा, ‘‘ पेयजल की बर्बादी की समस्या स्वीकार कर लिये जाने के बावजूद बहुत कम राशि वसूली गयी हैं । उल्लंघनकर्ताओं से महज प्रतीकात्मक राशि वसूले जाने से पर्यावरण कानून का पालन नहीं होता है।’’

उसने कहा, ‘‘ सभी विनियामकों द्वारा ‘प्रदूषण फैलाने वालों को जुर्माना भरना पड़ेगा’ के पर्यावरण के कानूनी सिद्धांत को लागू किया जाना चाहिए ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि पानी का अपव्यय लाभकारी नहीं है और ऐसी बर्बादी की कीमत वसूली जाए क्योंकि यह पर्यावरण की बहाली के लिए जरूरी है । केवल वैधानिक बदलावों तक सीमित नहीं रहा जाए क्योंकि यह ‘प्रदूषण फैलाने वाले से जुर्माना वसूलने’ के सिद्धांत का विकल्प नहीं है।’’

एनजीटी गाजियाबाद के भाजपा पार्षद राजेंद्र त्यागी एवं एक एनजीओ की याचिका पर सुनवाई कर रही है । याचिकार्ताओं का आरोप है कि पानी के अपव्यय को रोकने के लिए कदम नहीं उठाये जा रहे हैं।

भाषा

राजकुमार नरेश

नरेश


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