नयी दिल्ली, 13 मई (भाषा) राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) की एक कोर समिति ने प्रवासी श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए कई महत्वपूर्ण सिफारिशें की हैं।
इसके तहत इन श्रमिकों की जिलावार आवाजाही पर नजर रखने के लिए एक ‘राष्ट्रीय डैशबोर्ड’ स्थापित करने का सुझाव दिया गया है। इसके अलावा, वेतन में हेरफेर रोकने और पारदर्शिता में सुधार के लिए ‘पेरोल रिकॉर्ड’ से जुड़ी डिजिटल वेतन भुगतान प्रणालियों को बढ़ावा देने की भी सिफारिश की गई है।
इस संबंध में आयोग ने यहां अपने परिसर में ‘प्रवासी श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा: सरकार और निजी क्षेत्र की साझा जिम्मेदारी’ विषय पर अपने कोर समूह की एक बैठक आयोजित की।
बैठक की अध्यक्षता एनएचआरसी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) वी रामासुब्रमणियन ने की।
न्यायमूर्ति रामासुब्रमणियन ने प्रवासी श्रमिकों के लिए केवल अनुपालन-आधारित दृष्टिकोण से अधिकार-आधारित संस्कृति की जरूरत पर जोर दिया।
उन्होंने अंतरराज्यीय समन्वय, सुगम्य सामाजिक सुरक्षा और श्रम कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन जैसी व्यवस्था संबंधी सुधारों पर भी बल दिया।
आयोग के प्रमुख ने सुझाव दिया कि प्रवासी श्रमिकों के लिए बेहतर व्यवस्था बनाने के लिए भाषाई पहचान आधारित संगठनों के सदस्यों को समन्वय परिषदों में शामिल किया जाए।
अन्य सिफारिशों में प्रवासी मजदूरों के मुद्दों के समाधान के लिए समन्वय परिषद के गठन पर बल दिया गया। साथ ही, एक मजबूत सूचना तंत्र विकसित करने के अलावा, राष्ट्रीय स्तर पर एक औपचारिक सलाहकार व्यवस्था बनाने की भी वकालत की है, ताकि नीति निर्माण में उनका सीधा प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हो सके।
भाषा
प्रचेता धीरज
धीरज