नयी दिल्ली, 20 अगस्त (भाषा) राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने एक शिकायत के बाद पंजाब सरकार से रिपोर्ट मांगी है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि राज्य के कई सरकारी स्कूलों, खासकर सीमावर्ती और दूरदराज के इलाकों में स्थित विद्यालयों में स्वतंत्रता दिवस को लागू सरकारी निर्देशों के अनुरूप ‘‘उचित तरीके से नहीं मनाया गया।’’
मामले की 18 अगस्त की कार्यवाही के अनुसार, राज्य सरकार को चार सप्ताह के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट दाखिल करने को कहा गया है।
एनएचआरसी के सदस्य प्रियंक कानूनगो की अध्यक्षता वाली पीठ ने पंजाब के मुख्य सचिव को ‘‘राज्यवार, जिलावार और स्कूलवार’’ कार्रवाई एवं अनुपालन रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है।
आयोग ने शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव से भी चार सप्ताह के भीतर मामले की ‘‘जांच कर रिपोर्ट देने’’ को कहा है।
उनसे यह भी बताने को कहा गया है कि राष्ट्रीय शिक्षा संबंधी लागू ढांचे में निर्धारित शैक्षणिक उद्देश्यों और संवैधानिक मूल्यों के अनुरूप क्या कोई अतिरिक्त परामर्श या सुधारात्मक कदम उठाने की आवश्यकता है, ताकि भौगोलिक और सामाजिक-आर्थिक रूप से विविधता वाले क्षेत्रों में बच्चों के लिए शैक्षणिक और नागरिक अवसरों में एकरूपता सुनिश्चित की जा सके।
एनएचआरसी ने गृह मंत्रालय के सचिव से भी मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने को कहा है।
आयोग ने कहा कि उसने महाराष्ट्र निवासी विनय जोशी की शिकायत पर संज्ञान लिया है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि पंजाब के ‘‘कई सरकारी स्कूलों, विशेष रूप से सीमावर्ती क्षेत्रों, ग्रामीण, दूरदराज और कथित रूप से सुविधाओं से वंचित इलाकों’’ में स्वतंत्रता दिवस को लागू सरकारी निर्देशों के अनुरूप नहीं मनाया गया।
शिकायत के अनुसार, छात्रों को ध्वजारोहण, राष्ट्रगान तथा स्वतंत्रता संग्राम, संवैधानिक मूल्यों, मौलिक कर्तव्यों और राष्ट्रीय जिम्मेदारियों से जुड़ी अन्य शैक्षणिक गतिविधियों में ‘‘सार्थक रूप से शामिल नहीं किया गया।’’
आयोग ने कहा कि ऐसी कथित कमियों के कारण इन स्कूलों के बच्चों को बेहतर संसाधन वाले या शहरी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की तुलना में संभवत: ‘‘काफी अलग शैक्षणिक और नागरिक अनुभव’’ मिला होगा।
कार्यवाही में कहा गया कि आयोग के लिए यह जांच करना आवश्यक है कि ग्रामीण, दूरदराज और सीमावर्ती क्षेत्रों के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को भी शैक्षणिक और सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों में समान अवसर मिला या नहीं, जिनके जरिए उन्हें देश के संवैधानिक ढांचे, स्वतंत्रता संग्राम, राष्ट्रीय प्रतीकों, नागरिक जिम्मेदारियों और राष्ट्रीय मूल्यों से परिचित कराया जा सके।
आयोग ने कहा कि किसी एक स्कूल में स्वतंत्रता दिवस मनाने के तरीके को मानवाधिकारों का उल्लंघन नहीं कहा जा सकता। हालांकि, यदि प्रशासनिक उपेक्षा के कारण भौगोलिक या सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों के आधार पर बच्चों के किसी वर्ग के साथ ‘‘चूक या भेदभावपूर्ण व्यवहार का कथित पैटर्न’’ सामने आता है, तो मामले की जांच जरूरी है।
आयोग ने कहा कि राष्ट्रीय पर्व मनाना और देशभक्ति की भावना विकसित करना बच्चे की शैक्षणिक यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
आयोग ने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों से ऐसे वातावरण की अपेक्षा की जाती है जो हर बच्चे के समग्र विकास में मदद करे, जिसमें शैक्षणिक, शारीरिक, भावनात्मक, सामाजिक, सांस्कृतिक और रचनात्मक विकास शामिल है। यह संविधान के अनुच्छेद 21ए के तहत शिक्षा के अधिकार की संवैधानिक गारंटी के अनुरूप होना चाहिए।
एनएचआरसी ने कहा कि इसलिए यह पता लगाना जरूरी है कि स्वतंत्रता दिवस 2026 के संबंध में स्कूलों पर लागू निर्देश पंजाब के सभी सरकारी स्कूलों तक ‘‘उचित रूप से पहुंचाए गए थे या नहीं और क्या उन्हें समान रूप से लागू किया गया।’’
आयोग ने राज्य सरकार से यह भी स्पष्ट करने को कहा है कि स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम के क्रियान्वयन में कोई ‘‘जिलावार असमानता’’ सामने आई थी या नहीं।
भाषा मनीषा रंजन
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