किसी वर्ग को इस तरह के शीर्षक से अपमानित नहीं किया जा सकता: न्यायालय ने ‘घुसखोर पंडत’ मामले पर कहा

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किसी वर्ग को इस तरह के शीर्षक से अपमानित नहीं किया जा सकता: न्यायालय ने 'घुसखोर पंडत' मामले पर कहा

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  • Publish Date - February 12, 2026 / 01:12 PM IST,
    Updated On - February 12, 2026 / 01:12 PM IST

नयी दिल्ली, 12 फरवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने ‘घुसखोर पंडत’ शीर्षक पर अप्रसन्नता जताते हुए फिल्म निर्माता नीरज पांडे से बृहस्पतिवार को कहा कि आप इस तरह के शीर्षक का उपयोग करके समाज के किसी वर्ग का अपमान नहीं कर सकते।

उच्चतम न्यायालय ने ओटीटी मंच नेटफ्लिक्स पर मनोज बाजपेयी अभिनीत फिल्म की रिलीज पर रोक लगाए जाने का अनुरोध करने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की।

न्यायमूर्ति बी वी नागरत्ना और न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की पीठ ने फिल्म के खिलाफ दायर याचिका पर सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड और पांडे को नोटिस जारी किया।

पीठ ने कहा, ‘‘इस तरह के शीर्षक का इस्तेमाल करके आप समाज के एक वर्ग को अपमानित क्यों कर रहे हैं? यह नैतिकता और सार्वजनिक व्यवस्था के विरुद्ध है। जब तक आप हमें बदला हुआ शीर्षक नहीं बताते, हम आपको फिल्म रिलीज करने की अनुमति नहीं देंगे।’’

न्यायालय ने पांडे को यह हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया कि फिल्म ‘घुसखोर पंडत’ समाज के किसी भी वर्ग को अपमानित नहीं करती।

इस मामले में आगे की सुनवाई 19 फरवरी को होगी।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि यह फिल्म जाति एवं धर्म आधारित रूढ़िवादिता को बढ़ावा देती है और सार्वजनिक व्यवस्था, सांप्रदायिक सद्भाव और संवैधानिक मूल्यों के लिए खतरा है।

फिल्म निर्माता नीरज पांडे द्वारा निर्मित ‘घूसखोर पंडत’ की घोषणा नेटफ्लिक्स ने हाल में मुंबई में एक कार्यक्रम के दौरान की थी।

फिल्म में मनोज बाजपेयी के साथ नुसरत भरूचा, दिव्या दत्ता, साकिब सलीम और अक्षय ओबेरॉय अभिनय कर रहे हैं।

‘ब्राह्मण समाज ऑफ इंडिया’ के राष्ट्रीय संगठन सचिव अतुल मिश्रा ने एक जनहित याचिका दायर की है जिसमें नेटफ्लिक्स पर फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने का निर्देश दिए जाने का न्यायालय से अनुरोध किया गया है।

याचिका में आरोप लगाया गया कि फिल्म का शीर्षक और कथानक प्रथम दृष्टया आपत्तिजनक एवं अपमानजनक हैं और ये ब्राह्मण समुदाय को अपमानजनक तरीके से चित्रित करते हैं।

जनहित याचिका में ‘पंडत’ शब्द के ‘घुसखोर’ शब्द के साथ इस्तेमाल पर आपत्ति जताई गई है।

भाषा सिम्मी अमित

अमित