(9 Years of GST/ Image Credit: AI-generated)
नई दिल्ली: 9 Years of GST in India: भारत मे गुड्स एंड सर्विसेंज टैक्स (GST) लागू हुए 9 साल पूरे हो गए हैं। इसे देश के सबसे बड़े टैक्स सुधारों में गिना जाता है। GST को ‘एक देश, एक बाजार, एक टैक्स’ की सोच के साथ लागू किया गया था ताकि पूरे देश में एक समान टैक्स व्यवस्था बनाई जा सके। इसके लागू होने से राज्यों के बीच व्यापार करना आसान हुआ और अलग-अलग टैक्स नियमों की जटिलता काफी हद तक कम हुई। वहीं, पिछले कुछ सालों में सरकार ने इसमें कई बदलाव भी किए हैं ताकि टैक्स व्यवस्था अधिक सरल बन सके।
GST लागू होने से पहले भारत में कई तरह के अप्रत्यक्ष टैक्स लागू थे। इनमें एक्साइज ड्यूटी, वैट, सर्विस टैक्स, सेंट्रल सेल्स टैक्स और कई अन्य टैक्स शामिल थे। अलग-अलग राज्यों में अलग नियम होने के कारण कारोबार करना आसान नहीं था। कई बार एक ही उत्पाद पर अलग-अलग स्तर पर टैक्स लग जाता था। जिसे ‘टैक्स पर टैक्स’ कहा जाता था। इसका असर सीधे ग्राहकों की जेब पर पड़ता था और सामान की कीमत बढ़ जाती थी।
GST लागू होने के बाद कई पुराने टैक्स खत्म कर दिए गए और उनकी जगह एकीकृत टैक्स प्रणाली लागू की गई। इससे व्यापारियों को अलग-अलग विभागों में टैक्स जमा करने की जरूरत नहीं रही। टैक्स फाइल करना, रिकॉर्ड रखना और नियमों का पालन करना पहले की तुलना में आसान हो गया। इससे कारोबारियों का समय और खर्च दोनों कम हुए और प्रशासनिक प्रक्रिया भी सरल बनी।
GST पूरी तरह डिजिटल व्यवस्था पर आधारित है। ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन, ई-इनवॉइस और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड की वजह से टैक्स चोरी पर काफी हद तक रोक लगी है। सरकार का टैक्स संग्रह भी पहले की तुलना में बढ़ा है। इसके साथ ही राज्यों के बीच व्यापार आसान होने से देश में कारोबार का माहौल बेहतर हुआ है। इससे छोटे और बड़े दोनों तरह के उद्योगों को फायदा मिला और भारत में निवेश का माहौल भी मजबूत हुआ।
GST ने छोटे कारोबारियों को भी टैक्स प्रणाली से जुड़ने के लिए प्रोत्साहित किया। इससे अधिक व्यवसाय औपचारिक अर्थव्यवस्था का हिस्सा बने। सरकार को सही आर्थिक आंकड़े मिलने लगे और टैक्स संग्रह की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी हुई। इससे बिजनेस सिस्टम में जवाबदेही बढ़ी और आर्थिक गतिविधियों पर बेहतर निगरानी संभव हो सकी।
GST लागू होने के बाद कई उत्पादों पर लगने वाले कई टैक्स खत्म हो गए। इससे कई सामानों की कीमतों पर पॉजिटिव असर पड़ा और टैक्स व्यवस्था अधिक स्पष्ट हुई। कारोबारियों को इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ मिलने से उत्पादन लागत कम करने में मदद मिली। जिसका फायदा कई मामलों में उपभोक्ताओं तक भी पहुंचा। कुल मिलाकर GST ने देश की टैक्स व्यवस्था को सरल, पारदर्शी और आधुनिक बनाने में बड़ी भूमिका निभाई है।