केंद्रीय बजट में बेरोजगारी, महंगाई, भ्रष्टाचार पर काबू करने के लिए कोई उपाय नहीं : झामुमो
केंद्रीय बजट में बेरोजगारी, महंगाई, भ्रष्टाचार पर काबू करने के लिए कोई उपाय नहीं : झामुमो
नयी दिल्ली, 10 फरवरी (भाषा) राज्यसभा में मंगलवार को झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) सदस्य सरफराज अहमद ने केंद्रीय बजट को ‘भ्रमित’’ करार देते हुए कहा कि इसमें बेरोजगारी, महंगाई, भ्रष्टाचार जैसी गंभीर समस्याओं पर काबू पाने के लिए कोई कारगर उपाय नहीं किए गए हैं।
उच्च सदन में आम बजट 2026-27 पर चर्चा में भाग लेते हुए झामुमो सदस्य अहमद ने कहा कि चुनाव नजदीक आने पर लोक-लुभावन बजट पेश किया जाएगा लेकिन अभी चुनाव दूर है, इसलिए इस प्रकार का बजट पेश किया गया है।
उन्होंने कहा कि एक करोड़ रोजगार, हर व्यक्ति को 15 लाख रुपये सहित कई वादे किए गए थे लेकिन सभी खोखले साबित हुए। उन्होंने बजट के प्रावधानों का जिक्र करते हुए कहा कि जनता भी भ्रमित है और सरकार भी।
अहमद ने भ्रष्टाचार पर काबू के लिए कार्रवाई किए जाने की मांग करते हुए दावा किया कि प्रखंड में रिश्वत दिए बिना कोई काम नहीं होता और केंद्र इसके लिए राज्य पर जिम्मेदारी नहीं डाल सकते। उन्होंने बिहार में एक निर्माणाधीन पुल के गिर जाने का जिक्र करते हुए कहा कि सिर्फ आंकड़ों से काम नहीं चल सकता।
उन्होंने वंदे भारत ट्रेन में एक डिब्बा आम नागरिकों के लिए लगाने की मांग की।
चर्चा में भाग लेते हुए राष्ट्रीय जनता दल (राजद) सदस्य मनोज कुमार झा ने कहा कि सरकार द्वारा पेश आंकड़ों से विरोधाभासी स्थिति पैदा होती है। उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही है लेकिन बेरोजगारी गंभीर समस्या बनी हुई है। उन्होंने कहा कि युवा लाभांश की बात तो खूब हो रही है लेकिन इसके लिए कोई ‘रोडमैप’ नहीं है।
झा ने कहा कि रोजगार के बिना विकास सिर्फ भ्रम है और बजट को समावेशी होना चाहिए तथा अत्यधिक वित्तीय असमानता पर काबू के लिए प्रभावी कदम उठाए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रगतिशील कराधान होना चाहिए और अमीरों को अमीरी का दंड नहीं मिलना चाहिए।
झा ने बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दिए जाने की भी मांग की।
भाजपा के सिकंदर कुमार ने सरकार की विभिन्न उपलब्धियों का जिक्र करते हुए कहा कि यह आंकड़ों का बजट नहीं बल्कि लोगों की आकांक्षाओं का बजट है और इसमें वित्तीय घाटा पर काबू पाने की देशा में प्रभावी कदम उठाए गए हैं।
उन्होंने कहा कि बजट में पूंजीगत व्यय पर जोर देते हुए वित्तीय अनुशासन पर ध्यान केंद्रित किया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की वजह से ही मुद्रास्फीति की दर काबू में है। उन्होंने कहा कि पिछली संप्रग सरकार के कार्यकाल में मुद्रास्फीति की दर दहाई अंक में होती थी जो अब नियंत्रण में है।
उन्होंने बैंकों की गैर-निष्पादित आस्ति (एनपीए) का जिक्र करते हुए कहा कि पूर्वीवर्ती सरकार में यह 11 प्रतिशत तक पहुंच गया था जो अब घटकर छह प्रतिशत रह गया है।
निर्दलीय अजीत कुमार भुइंया ने बजट को युवाओं, किसानों तथा आम लोगों का विरोधी करार दिया और कहा कि सरकार को अपने वादे पूरा करने पर जोर देना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार ने असम से कई वादे किए थे लेकिन उन्हें पूरा नहीं किया गया।
भाषा
अविनाश माधव
माधव

Facebook


