पुनरीक्षण पर न्यायालय के अंतरिम आदेश को मानने के अलावा कोई विकल्प नहीं, भ्रम ना फैलाएं:कांग्रेस

Ads

पुनरीक्षण पर न्यायालय के अंतरिम आदेश को मानने के अलावा कोई विकल्प नहीं, भ्रम ना फैलाएं:कांग्रेस

  •  
  • Publish Date - July 12, 2025 / 05:46 PM IST,
    Updated On - July 12, 2025 / 05:46 PM IST

नयी दिल्ली, 12 जुलाई (भाषा) कांग्रेस ने शनिवार को कहा कि बिहार में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के संदर्भ में उच्चतम न्यायालय द्वारा दिए गए महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश को लेकर भ्रम और दुष्प्रचार फैलाया जा रहा है, जबकि निर्वाचन आयोग तथा दूसरे संबंधित पक्षों के पास फिलहाल इसे मानने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।

पार्टी के वरिष्ठ नेता अभिषेक सिंघवी ने कहा कि अंतरिम आदेश में स्पष्ट किया गया है कि दस्तावेज के रूप में आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र और राशन कार्ड को स्वीकार किया जाएगा।

उच्चतम न्यायालय ने बीते बृहस्पतिवार को निर्वाचन आयोग को बिहार में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को जारी रखने की अनुमति देते हुए इसे ‘‘संवैधानिक दायित्व’’ बताया था।

न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने इस कवायद के समय को लेकर सवाल भी उठाया था और कहा था कि बिहार में एसआईआर के दौरान आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र और राशन कार्ड पर दस्तावेज के तौर पर विचार किया जा सकता है।

मामले की अगली सुनवाई 28 जुलाई को होनी है। ‘इंडिया’ गठबंधन के कई घटक दलों की तरफ से इस मामले में पैरवी करने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता सिंघवी ने संवाददाताओं से कहा कि वह न्यायालय में लंबित मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे, लेकिन यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि अंतरिम आदेश को लेकर भ्रम और दुष्प्रचार फैलाने की जरूरत नहीं है।

उनका कहना था कि एसआईआर की कवायद किसी कानूनी संशोधन के माध्यम से नहीं, बल्कि एक प्रशासनिक आदेश के जरिए शुरू हुई और इसमें सिर्फ एक बिंदु नागरिकता पर जोर दिया जा रहा है, जबकि नागरिकता की कसौटी को देखने का अधिकार क्षेत्र चुनाव आयोग का नहीं है।

सिंघवी ने कटाक्ष करते हुए कहा, ‘आप और हम पिछले 15 वर्षों से अगर छींकते भी हैं तो हमें आधार दिखाना पड़ता है, आप कहीं भी चले जाइए तो आधार मांगा जाता है। लेकिन चुनाव आयोग इसे नजर अंदाज कर सकता है। इसी तरह वह खुद के द्वारा जारी मतदाता पहचान पत्र को भी नजरअंदाज कर सकता है और राशन कार्ड को भी नजरअंदाज कर सकता है। ‘

उन्होंने कहा कि एसआईआर से जुड़े आदेश के तहत बिहार में करीब पांच करोड़ मतदाताओं के दस्तावेजों की जांच होनी है लेकिन दो ढाई महीने के भीतर इस कवायद को अंजाम देना लगभग असंभव लगता है।

सिंघवी ने इस बात पर जोर देते हुए कहा कि कानून में कहीं भी एसआईआर का जिक्र नहीं है सिर्फ ‘आईआर’ यानी की गहन पुनरीक्षण की बात हुई है। उन्होंने कहा कि 2003 में गहन पुनरीक्षण हुआ था और उसके बाद से बिहार में तकरीबन 10 चुनाव हो चुके हैं और इन्हें लेकर आयोग को कोई आपत्ति नहीं थी।

उनका कहना था कि अगर आयोग को यह करना था तो बिहार विधानसभा चुनाव के बाद दिसंबर से इसे शुरू किया जा सकता था। उन्होंने सवाल किया कि चुनाव से दो महीने पहले ही इसे क्यों शुरू किया गया?

सिंघवी के अनुसार, न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र और राशन कार्ड पर विचार किया जाएगा। एक सवाल के जवाब में कांग्रेस के नेता ने कहा कि आयोग के समक्ष फिलहाल अंतरिम आदेश को मानने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।

उन्होंने कहा कि विपक्ष ने एसआईआर की कवायद को निरस्त करने का अनुरोध किया है, लेकिन सुनवाई में अभी इस इस बिंदु पर निर्णय होने की बारी नहीं आई है।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने कहा, ‘‘न्यायालय ने बहुत ही महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश दिया है। बहुत सारे बिंदु लंबित हैं लेकिन अभी से अटकलें लगाना ठीक नहीं है।’’

भाषा हक पवनेश संतोष

संतोष