खालड़ा हत्या मामले के दोषियों की समयपूर्व रिहाई का कोई प्रस्ताव नहीं: आप
खालड़ा हत्या मामले के दोषियों की समयपूर्व रिहाई का कोई प्रस्ताव नहीं: आप
चंडीगढ़, नौ जुलाई (भाषा) आम आदमी पार्टी (आप) ने बृहस्पतिवार को इन आरोपों को खारिज किया कि पंजाब सरकार ने मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा हत्या मामले के दोषियों की समयपूर्व रिहाई के किसी प्रस्ताव को मंजूरी दी है। पार्टी ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस संबंध में किसी भी फाइल पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं।
पंजाब में ‘आप’ के मीडिया प्रभारी बलतेज पन्नू ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि राज्य सरकार द्वारा इस मामले के दोषी पूर्व डीएसपी जसपाल सिंह की समयपूर्व रिहाई की सिफारिश किए जाने संबंधी खबरें ‘‘झूठी और मनगढ़ंत’’ हैं।
उन्होंने कहा कि इस मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने की थी और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 477, जो दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) के तहत धारा 435 थी, के तहत सीबीआई द्वारा जांचे गए मामलों में समयपूर्व रिहाई के किसी भी प्रस्ताव पर निर्णय का अधिकार केंद्रीय गृह मंत्रालय (एमएचए) के पास होता है।
पन्नू ने कहा कि पंजाब सरकार को दोषियों की समयपूर्व रिहाई के संबंध में गृह मंत्रालय से न तो कोई प्रस्ताव प्राप्त हुआ है और न ही उसने ऐसे किसी प्रस्ताव पर विचार किया है।
उन्होंने बताया कि जसपाल सिंह ने वर्ष 2017 में गृह मंत्रालय के समक्ष समयपूर्व रिहाई के लिए आवेदन किया था, जिसे 2018 में खारिज कर दिया गया था।
उन्होंने कहा कि राज्यपाल की मंजूरी के बाद 2019 में नया प्रस्ताव फिर से गृह मंत्रालय को भेजा गया था। उन्होंने कहा कि वहीं, सह-दोषियों सतनाम सिंह, सुरिंदर सिंह और जसबीर सिंह से संबंधित ऐसे ही प्रस्तावों को गृह मंत्रालय ने मार्च 2023 में खारिज कर दिया था।
उन्होंने कहा कि अक्टूबर 2023 में इन मामलों को फिर से गृह मंत्रालय के पास भेजा गया था, लेकिन अब तक उसकी सहमति प्राप्त नहीं हुई है।
पन्नू ने आरोप लगाया कि विपक्षी दल, विशेष रूप से शिरोमणि अकाली दल, यह दावा करके लोगों को गुमराह कर रहे हैं कि पंजाब सरकार ने दोषियों की सजा में राहत संबंधी फाइल पर हस्ताक्षर करके उसे राज्यपाल के पास भेज दिया है।
उन्होंने हाल में दिवंगत मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा की पत्नी बीबी परमजीत कौर खालड़ा के उस बयान का भी उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि 1997 में सत्ता में आने के बाद शिरोमणि अकाली दल ने इस मामले में न्याय दिलाने का अपना वादा पूरा नहीं किया।
पन्नू ने यह भी आरोप लगाया कि मामले में आरोपी अधिकारियों को न्याय के कटघरे में लाने के बजाय ऊंचे पदों से पुरस्कृत किया गया।
उन्होंने फिल्म ‘सतलुज’ का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि इसे एक ओटीटी मंच से कुछ ही घंटे में हटा दिया गया और भाजपा नीत केंद्र सरकार पर पंजाब के अशांत अतीत से जुड़े तथ्यों को दबाने का प्रयास करने का आरोप लगाया।
उन्होंने कुछ मीडिया संस्थानों की भी आलोचना करते हुए कहा कि उन्होंने बिना पुष्टि किए खबरें प्रकाशित कीं। उन्होंने पंजाब सरकार से ‘‘झूठी जानकारी’’ फैलाने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने का आग्रह किया।
‘आप’ द्वारा जारी तथ्य-पत्र के अनुसार, खालड़ा हत्याकांड में आठ लोगों को दोषी ठहराया गया था, जिनमें से चार की मृत्यु हो चुकी है।
जीवित दोषियों में जसपाल सिंह, सतनाम सिंह, सुरिंदर सिंह और जसबीर सिंह शामिल हैं। इनमें से तीन पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के आदेश के तहत फिलहाल जमानत पर हैं, जबकि सुरिंदर सिंह एक अन्य मामले में न्यायिक हिरासत में है।
भाषा अमित माधव
माधव

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