महज बदलाव की प्रक्रिया के कारण किसी अधिकरण का कामकाज बंद नहीं हो: उच्चतम न्यायालय

महज बदलाव की प्रक्रिया के कारण किसी अधिकरण का कामकाज बंद नहीं हो: उच्चतम न्यायालय

महज बदलाव की प्रक्रिया के कारण किसी अधिकरण का कामकाज बंद नहीं हो: उच्चतम न्यायालय
Modified Date: September 2, 2026 / 06:32 pm IST
Published Date: September 2, 2026 6:32 pm IST

नयी दिल्ली, दो सितंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया कि वे जिला और राज्य उपभोक्ता आयोगों में रिक्त पदों को रेखांकित करने वाली वस्तु स्थिति रिपोर्ट पर तीन सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करें।

शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि ‘‘महज बदलाव की प्रक्रिया के कारण किसी अधिकरण का कामकाज बंद नहीं होना चाहिए।’’

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची एवं न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया कि वे आयोग के सदस्यों के वेतन और भत्तों के बारे में पूर्व में दिए गए आदेश का पालन करने की जानकारी दें।

सुनवाई की शुरुआत में, अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणि ने न्यायालय को बताया कि राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी) के अध्यक्ष ने उपभोक्ता आयोग में रिक्त पदों और लंबित मामलों पर एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपी है।

शीर्ष अदालत ने कहा कि एनसीडीआरसी के अध्यक्ष द्वारा सौंपी गई रिपोर्ट पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है।

प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘संस्थागत मजबूती बहुत जरूरी है और इसके लिए काफी काम करने की जरूरत पड़ सकती है।’’

सुनवाई के दौरान, वेंकटरमणि ने कहा कि एक मुद्दा उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति के तरीके से संबंधित है।

उन्होंने कहा, ‘‘इस अदालत ने निर्देश दिया था कि न्यायिक सदस्यों के लिए कोई परीक्षा आयोजित नहीं होनी चाहिए, जबकि अन्य सदस्यों को परीक्षा में शामिल होना होगा। इस व्यवस्था से मुश्किलें पैदा हुईं और कई राज्यों को नियुक्तियां करने में समस्याओं का सामना करना पड़ा। हम पूरी प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने का प्रयास कर रहे हैं।’’

इसके बाद पीठ ने कहा, ‘‘सिर्फ बदलाव की प्रक्रिया की वजह से किसी अधिकरण का कामकाज बंद नहीं होना चाहिए।’’

इससे पहले, न्यायालय ने एनसीडीआरसी में लंबित मामलों का गंभीरता से संज्ञान लिया था और केंद्र से कहा था कि वह लंबित मामलों का निस्तारण करने के लिए क्षेत्रीय और सर्किट पीठ बनाने पर विचार करे।

शीर्ष अदालत ने राज्य और जिला उपभोक्ता आयोगों के कामकाज की समीक्षा (परफॉर्मेंस ऑडिट) करने के लिए भी कहा था।

पीठ ने एनसीडीआरसी के अध्यक्ष से कुल लंबित मामलों, दर्ज की गई कुल शिकायतों, मामलों के निस्तारण की औसत दर, लंबित मामले के निस्तारण में लगने वाले अनुमानित समय और आयोग में सदस्यों की संख्या बढ़ाने की जरूरत के बारे में वस्तु स्थिति रिपोर्ट मांगी थी।

न्यायालय उपभोक्ता आयोग के कामकाज पर नजर रख रहा है, जिसमें नियुक्तियां, सेवा शर्तें और अवसंरचना शामिल हैं।

शीर्ष अदालत ने 11 फरवरी के अपने आदेश में, कई छोटे राज्यों, खासकर पूर्वोत्तर के राज्यों और केंद्र-शासित प्रदेशों की इन दलीलों पर गौर किया था कि बहुत कम लंबित मामलों के बावजूद अलग-अलग उपभोक्ता आयोग बनाए रखना आर्थिक रूप से व्यावहारिक नहीं है।

न्यायालय ने यह भी कहा कि कुछ राज्यों ने ऐसे राज्य उपभोक्ता आयोग नहीं बनाए थे जिनकी अध्यक्षता उच्च न्यायालय के मौजूदा या पूर्व न्यायाधीश करें। इसलिए पीठ ने निर्देश दिया कि कुछ राज्यों के लंबित मामलों को संबंधित उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल को हस्तांतरित कर दिया जाए।

भाषा

सुभाष माधव

माधव


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