नयी दिल्ली, 23 मार्च (भाषा) राज्यसभा में सोमवार को विपक्षी दलों के कई सदस्यों ने केंद्र सरकार द्वारा विभिन्न मंत्रालयों को आवंटित राशि पूरी तरह खर्च नहीं होने पर चिंता जतायी और कहा कि यह स्थिति ‘‘सामूहिक नाकामी’’ को दर्शाती है।
उच्च सदन में अनुदान की अनुपूरक मांगों पर चर्चा में भाग लेते हुए तृणमूल कांग्रेस के साकेत गोखले ने कहा कि श्रम एवं रोजगार, जल जीवन, आवास, पर्यटन, कौशल विकास, जनजातीय मामलों सहित कई मंत्रालयों के बजट अनुमान में कटौती की गई है क्योंकि आवंटित राशि पूरी तरह खर्च नहीं की जा सकी।
उन्होंने कहा कि यह कोई बचत खाता नहीं है जिसमें बचत करने पर जोर दिया जाए। उन्होंने कहा कि आवंटित राशि का खर्च नहीं होना नाकामी है और इसका अर्थ है कि देश के करदाताओं से कर तो लिया गया लेकिन उन्हें सुविधाएं नहीं दी गईं।
उन्होंने कहा कि बजट में गुलाबी तस्वीर दिखाई जाती है लेकिन स्थिति गंभीर है। उन्होंने दावा किया कि सरकार पर ऋण का भारी बोझ है और उसकी आमदनी का बड़ा हिस्सा (40 प्रतिशत) ऋण पर सूद चुकाने में खर्च हो जाता है।
गोखले ने पश्चिम बंगाल की बकाया राशि जल्द जारी करने की मांग करते हुए आरोप लगाया कि वहां अघोषित आपातकाल लागू कर दिया गया है। उन्होंने दावा किया कि विधानसभा चुनाव जीतने के बाद ममता बनर्जी फिर से मुख्यमंत्री बनेंगी।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार एलपीजी और पेट्रोल व डीजल के मामलों में जनता को गुमराह कर रही है।
आम आदमी पार्टी (आप) सदस्य विक्रमजीत सिंह साहनी ने कहा कि पश्चिम एशिया में युद्ध का असर पूरी दुनिया पर है और कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित हुई है जिससे कीमतों में भारी वृद्धि हो सकती है।
आप सदस्य ने भी विभिन्न योजनाओं में आवंटित राशि खर्च नहीं होने पर आपत्त जताई और कहा कि खर्च नहीं होने पर राशि वापस कर देना सामूहिक नाकामी है। उन्होंने कृषि और युवाओं के लिए आयोग गठित करने की मांग की जो विभिन्न योजनाओं की निगरानी भी कर सके।
उन्होंने कहा कि कई योजनाएं बहुत अच्छी हैं लेकिन उनके कार्यान्वयन में गड़बड़ी है। उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास होना चाहिए कि योजनाएं युवाओं तक पहुंचे।
बीजू जनता दल (बीजद) के शुभाशीष खुंटिया ने आरोप लगाया कि उनके राज्य ओडिशा की उपेक्षा की जा रही है और राज्य के लिए आवंटित बजट का पूरा उपयोग नहीं हो सका है।
उन्होंने पिछले दिनों राज्य के एक प्रमुख अस्पताल में आग लगने से 13 मरीजों की मौत होने का जिक्र करते हुए कहा कि इसके लिए सिर्फ लापरवाही जिम्मेदार है।
बीजद सदस्य ने मांग की कि बुनियादी ढांचा पर खर्च में वृद्धि की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि ओडिशा में हर साल चक्रवात आता है लेकिन उससे निपटने के लिए राज्य को जरूरी संसाधन नहीं मिले हैं। उन्होंने राज्य में धान खरीद का भी मुद्दा उठाया और कहा कि धान खरीद नहीं होने से छोटे किसान परेशान हैं।
उन्होंने अपने राज्य की कानून व्यवस्था में गिरावट आने का भी आरोप लगाया। वहीं राष्ट्रीय जनता दल (राजद) सदस्य संजय यादव ने बजट को आंकड़ों का अखाड़ा बताया जिसमें गरीबों को ही पटकनी मिलती है।
उन्होंने कहा कि ‘‘हमारी अर्थव्यवस्था शोर बहुत करती है लेकिन अंदर से खोखली है।’’ राजद सदस्य ने दावा किया कि बेरोजगारी और महंगाई से हर कोई परेशान है। बैंक से छोटे ऋण लेने वाले लोगों की परेशानियों का जिक्र करते हुए यादव ने कहा कि थोड़ी भी चूक होने पर उन्हें बैंक कर्मचारियों द्वारा प्रताड़ित किया जाता है जबकि बड़ी रकम लेकर लोग भाग जाते हैं और सरकार उनका ऋण माफ कर देती है।
समाजवादी पार्टी (सपा) के रामजीलाल सुमन ने भी विभिन्न मदों में आवंटित राशि केखर्च नहीं होने पर चिंता जतायी और कहा कि देश में स्वास्थ्य क्षेत्र का बुरा हाल है। उन्होंने कहा कि सरकारी अस्पतालों में सुविधाएं नहीं हैं जबकि निजी अस्पताल ‘‘मरीजों की लाशों के सौदागर’’ बन गए हैं। उन्होंने दावा किया कि दिल्ली सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार भी आवंटित राशि खर्च नहीं करने में आगे है।
माकपा के जॉन ब्रिटास ने पश्चिम एशिया युद्ध को अनैतिक करार देते हुए कहा कि सरकार को इस बारे में टिप्पणी करनी चाहिए थी और युद्ध की निंदा करनी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि 2003 में इराक युद्ध के समय संसद ने प्रस्ताव पारित किया था लेकिन इस बार संसद मौन है।
चर्चा में राकांपा (शप) सदस्य फौजिया खान, द्रमुक के एस. कल्याणसुंदरम, वाईएसआर कांग्रेस के वाई. वेंकट सुब्बा रेड्डी, अन्नाद्रमुक सदस्य एम थंबीदुरै ने भी भाग लिया।
भाषा अविनाश माधव
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