ओडिशा: बौद्ध विरासत को बढ़ावा देने और पर्यटन को प्रोत्साहित करने के लिए जिरांग मठ के साथ समझौता

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ओडिशा: बौद्ध विरासत को बढ़ावा देने और पर्यटन को प्रोत्साहित करने के लिए जिरांग मठ के साथ समझौता

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  • Publish Date - July 15, 2026 / 06:55 PM IST,
    Updated On - July 15, 2026 / 06:55 PM IST

भुवनेश्वर, 15 जुलाई (भाषा) ओडिशा सरकार ने राज्य की समृद्ध बौद्ध विरासत के संरक्षण और प्रचार-प्रसार के साथ-साथ सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए बुधवार को जिरांग मठ के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए।

अधिकारियों ने बताया कि गुरु पद्मसंभव बौद्ध महाविहार के साथ इस साझेदारी के तहत आध्यात्मिक और अनुभव आधारित पर्यटन कार्यक्रम विकसित किए जाएंगे, जिनमें ध्यान शिविर, आध्यात्मिक शिक्षा से जुड़ी पहल, मठ जीवन का अनुभव कराने वाले कार्यक्रम व तीर्थयात्रा गतिविधियां शामिल हैं।

उन्होंने बताया कि इस पहल के तहत अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों, शैक्षणिक सहयोग और ज्ञान के आदान-प्रदान के माध्यम से बौद्ध अध्ययन को भी बढ़ावा दिया जाएगा।

अधिकारियों ने बताया कि साथ ही, रत्नागिरि–उदयगिरि–ललितगिरि–जिरांग बौद्ध परिपथ के समग्र विकास पर भी काम किया जाएगा, जिसमें विरासत संरक्षण, पर्यटकों के अनुभव को बेहतर बनाना और सतत पर्यटन को विशेष महत्व दिया जाएगा।

उपमुख्यमंत्री प्रवती परिदा, संस्कृति मंत्री सूर्यवंशी सूरज, मुख्य सचिव अनु गर्ग और जिरांग स्थित गुरु पद्मसंभव बौद्ध महाविहार के अध्यक्ष ग्येत्रुल जिग्मे रिनपोछे की मौजूदगी में इस समझौते पर हस्ताक्षर हुए।

परिदा ने इस अवसर पर कहा कि ओडिशा की बौद्ध विरासत राज्य की सबसे बड़ी सांस्कृतिक धरोहरों में से एक है और पर्यटन की अपार संभावनाओं का महत्वपूर्ण आधार भी है।

उन्होंने विश्वास जताया कि यह साझेदारी ओडिशा को बौद्ध तीर्थयात्रा और सांस्कृतिक पर्यटन के लिए एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय गंतव्य के रूप में और मजबूत बनाएगी।

भाषा जितेंद्र खारी

खारी