ओडिशा सीएमओ से जांच रिपोर्ट गायब होने के मामले में पुलिस ने पूर्व अधिकारियों को तलब किया

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ओडिशा सीएमओ से जांच रिपोर्ट गायब होने के मामले में पुलिस ने पूर्व अधिकारियों को तलब किया

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  • Publish Date - July 16, 2026 / 09:35 AM IST,
    Updated On - July 16, 2026 / 09:35 AM IST

भुवनेश्वर, 16 जुलाई (भाषा) ओडिशा में पिछली बीजू जनता दल (बीजद) सरकार के कार्यकाल के दौरान मुख्यमंत्री कार्यालय से जांच आयोग की दो रिपोर्ट कथित तौर पर गायब होने के मामले की जांच के सिलसिले में पुलिस ने भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के पूर्व अधिकारी राजेश वर्मा और आईटी विभाग के पूर्व सचिव मनोज मिश्रा को तलब किया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।

अधिकारियों ने बताया कि दोनों पूर्व अधिकारियों को 22 जुलाई को पूर्वाह्न 11 बजे भुवनेश्वर में कैपिटल थाने के जांच अधिकारियों के समक्ष पेश होने को कहा गया है।

वर्मा को बुधवार को जारी नोटिस में कहा गया है, ‘‘आपसे अनुरोध है कि जांच से संबंधित कोई भी दस्तावेज, रिकॉर्ड, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण या कोई अन्य सामग्री, जो आपके पास या आपके नियंत्रण में हो, उसे अपने साथ लाएं।’’

वर्मा ने 2017 और 2019 के बीच मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव के रूप में सेवा दी थी।

भारतीय रेल यातायात सेवा (आईआरटीएस) के पूर्व अधिकारी मिश्रा को रेल मंत्रालय से इस्तीफा देने के एक दिन बाद 2022 में अनुबंध के आधार पर इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) विभाग का प्रधान सचिव नियुक्त किया गया था।

वह तत्कालीन राज्य सरकार में डेटाबेस और आईटी संचालन की देखरेख के लिए जिम्मेदार थे। जून 2024 में सरकार परिवर्तन के बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया।

ओडिशा गृह विभाग ने 10 जून को पुलिस में शिकायत दर्ज कराई जिसमें आरोप लगाया गया कि मुख्यमंत्री कार्यालय से दो जांच रिपोर्ट गायब हैं।

गायब रिपोर्ट न्यायमूर्ति ए.एस. नायडू आयोग और राजस्व मंडल आयुक्त की जांच से जुड़ी हैं। न्यायमूर्ति नायडू आयोग ने विश्व हिंदू परिषद (विहिप) नेता स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती की हत्या के बाद 2008 में हुए कंधमाल दंगों की जांच की थी, जबकि राजस्व मंडल आयुक्त ने भुवनेश्वर के एक निजी अस्पताल में 2016 में लगी आग की जांच की थी। इस घटना में 20 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी।

शिकायत के आधार पर एक मामला दर्ज किया गया। शिकायत के अनुसार, सरकार बदलने के बाद कई जांच रिपोर्ट गृह विभाग भेजी गईं लेकिन आरोप है कि तत्कालीन सीएमओ से ये दो रिपोर्ट नहीं सौंपी गई थीं।

भाषा सुरभि प्रशांत

प्रशांत