भुवनेश्वर, दो जुलाई (भाषा) ओडिशा के विभिन्न सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकों ने स्थानांतरण नीति में पारदर्शिता और कैडर पुनर्गठन सहित 10 सूत्री मांगों को लेकर बृहस्पतिवार को लगातार दूसरे दिन अनिश्चितकालीन हड़ताल जारी रखी, जिससे स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हुईं।
ओडिशा मेडिकल सर्विसेज एसोसिएशन के बैनर तले लगभग 8,000 चिकित्सकों ने राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस के अवसर पर बुधवार को जिला मुख्यालय अस्पतालों और उपखंडों व ग्रामीण क्षेत्रों के स्वास्थ्य केंद्रों में काम बंद आंदोलन शुरू किया था।
एक अधिकारी ने बताया हालांकि, मेडिकल कॉलेजों में चिकित्सक काली पट्टी पहनकर मरीजों को सेवाएं दे रहे हैं।
उन्होंने बताया कि कई स्वास्थ्य केंद्रों में संविदा पर कार्यरत चिकित्सकों ने भी अपनी सेवाएं जारी रखी हैं।
प्रदर्शन कर रहे चिकित्सकों की प्रमुख मांगों में कैडर पुनर्गठन, केबीके (कालाहांडी-बोलांगीर-कोरापुट) एग्जिट पॉलिसी, स्थानांतरण नीति में पारदर्शिता, बीमा, प्रोत्साहन तथा केंद्र सरकार की स्वास्थ्य योजना (सीजीएचएस) के अनुरूप ‘डायनेमिक एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन’ (डीएसीपी) लाभ शामिल हैं।
कालाहांडी-बोलांगीर-कोरापुट (केबीके) क्षेत्र में चिकित्सकों के लिए तीन वर्ष की अनिवार्य सेवा समझौता है हालांकि एसोसिएशन ने आरोप लगाया कि तीन वर्ष पूरे होने के बाद भी उनका स्थानांतरण नहीं किया जाता है।
ओडिशा मेडिकल सर्विसेज एसोसिएशन के अध्यक्ष किशोर चंद्र मिश्रा ने बताया, “चूंकि सरकार ने हमारी वास्तविक मांगों को अनदेखा किया है, इसलिए हमें अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने के लिए मजबूर होना पड़ा।”
उन्होंने कहा कि अगर सरकार उनकी मांगों पर विचार नहीं करती है, तो विरोध जारी रहेगा और स्वास्थ्य सेवाओं में बाधा के लिए प्रशासन जिम्मेदार होगा।
एक अन्य अधिकारी ने बताया, “इस हड़ताल से कई सरकारी अस्पतालों में, विशेषकर जिला और ग्रामीण क्षेत्रों में, ओपीडी और नियमित उपचार सेवाएं गंभीर रूप से प्रभावित हुई हैं।”
चिकित्सकों के ड्यूटी पर अनुपस्थित रहने के कारण बालासोर, भद्रक, केंद्रपाड़ा और जाजपुर के जिला मुख्यालय अस्पतालों में ओपीडी मरीज लंबी कतारों में खड़े दिखाई दिए।
भाषा जितेंद्र नरेश
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