ओडिशा सरकार ने बचाए गए पांच ओरंगुटान की देखभाल के लिए तकनीकी समिति गठित की

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ओडिशा सरकार ने बचाए गए पांच ओरंगुटान की देखभाल के लिए तकनीकी समिति गठित की

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  • Publish Date - September 13, 2026 / 03:40 PM IST,
    Updated On - September 13, 2026 / 03:40 PM IST

भुवेनश्वर, 13 सितंबर (भाषा) ओडिशा सरकार ने बालासोर जिले से बचाए गए ओरांगुटान के पांच बच्चों की देखभाल की निगरानी के लिए पांच सदस्यीय तकनीकी समिति गठित की है। अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी।

अधिकारियों ने बताया कि ओरंगुटान के बच्चों को फिलहाल भुवनेश्वर स्थित नंदनकानन प्राणी उद्यान में रखा गया है।

एक आदेश के अनुसार, यह समिति बचाए गए जानवरों के कल्याण और देखभाल से जुड़े मुद्दों का आकलन करेगी और उनकी सही देखभाल के लिए तकनीकी सुझाव देगी।

आदेश के मुताबिक नंदनकानन प्राणी उद्यान के निदेशक समिति के सदस्य-संयोजक होंगे। इसमें मैसूर के श्री चामराजेन्द्र प्राणी उद्यान के एक पशु चिकित्सक, देहरादून स्थित भारतीय वन्यजीव संस्थान के एक प्रतिनिधि और भुवनेश्वर स्थित ओडिशा कृषि और तकनीकी विश्वविद्यालय (ओयूएटी) स्थित वन्य जीव स्वास्थ्य केंद्र के परियोजना समन्वयक सदस्य के तौर पर शामिल होंगे।

इसमें कहा गया है कि जरूरत पड़ने पर समिति राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रख्यात विशेषज्ञों और संगठनों से सलाह ले सकती है या उन्हें शामिल कर सकती है।

मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक और प्रधान मुख्य वन संरक्षण (वन्यजीव) पी.के. झा ने बताया कि राज्य की सबसे पहली प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि भारत में न पाए जाने वाले इन पांच जानवरों को नंदनकानन में सबसे अच्छी देखभाल मिले।

उन्होंने कहा, ‘‘ ओरंगटुन के इन बच्चों की सेहत पर नजर रखने के लिए तीन कर्मी और चिकित्सक चौबीसों घंटे काम कर रहे हैं।’’

ओयूएटी के वन्यजीव इलाज केंद्र के प्रमुख आदित्य आचार्य ने बताया कि बचाए गए ओरंगुटान धीरे-धीरे अपने देखभाल करने वालों से घुल-मिल रहे हैं और उनसे आसानी से खाना ले रहे हैं।

नंदनकानन की पृथकवास इकाई में ओरंगुटान की देखभाल कर रहे एक कर्मी ने बताया कि विशेषज्ञों द्वारा तैयार किए गए भोजन योजना के तहत जानवरों को हर दो घंटे में दूध और साथ ही नियमित अंतराल पर सेब और केले का जूस और उबले हुए आलू दिए जा रहे हैं।

उन्होंने बताया कि ओरंगुटान के पांच बच्चों में से एक बच्चा बुखार से ठीक हो गया है, जबकि दो अन्य बच्चों को सर्दी-जुकाम से राहत मिली है। साथ ही, उन्होंने यह भी बताया कि डीएनए जांच के लिए रक्त नमूने लेने का काम लगभग 10 दिनों के लिए टाल दिया गया है।

बालासोर जिले के भोगराई प्रखंड स्थित विचित्रपुर जंगल से आठ सितंबर बो ओरंगुटान के पांच बच्चों को बचाया गया था।

ओरंगुटान एक तरह के ‘वनमानुष’ (एप) हैं जो इंसानों के काफी करीबी होते हैं।

भाषा धीरज रंजन

रंजन