Employees Removed Before Diwali: भाजपा सरकार ने दिवाली से पहले 500 से अधिक कर्मचारियों की कर दी छुट्टी! मंत्रियों के बंगले में कर रहे थे ड्यूटी, जानिए क्यों लिया गया ऐसा बड़ा फैसला / Image: AI Generated
मुंबई: Employees Removed Before Diwali आगामी दिनों में हिंदू धर्म के कई त्योहार, गणेश चतुर्थी, नवरात्रि, दशहरा और दिवाली आने वाली है। ऐसे में कर्मचारियों को उम्मीद है कि सरकार महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी के साथ-साथ अच्छे बोनस का भुगतान करेगी। लेकिन इन सब के बीच महाराष्ट्र के सरकारी कर्मचारी से जुड़ी बड़ी खबर निकलकर सामने आ रही है। खबर हे कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने 500 से अधिक कर्मचारियों को मूल विभाग में वापस भेज दिया है। बताया जा रहा है कि ये कर्मचारी बिना कोई वेरिफिकेशन के मंत्रियों के कार्यालय में ड्यूटी कर रहे थे।
Employees Removed Before Diwali मिली जानकारी के अनुसार सीएम देवेंद्र फडणवीस ने भर्ती में सख्ती के चलते बिना वेरिफिकेशन किए मंत्री-कार्यालय में काम कर रहे 550 कर्मचारियों को हटा दिया है। बताया जा रहा है कि ये फैसला भर्ती में सख्ती के चलते लिया गया है। ये सभी कर्मचारी आउटसोर्सिंग, लोनिंग और अनौपचारिक मौखिक आदेशों का तैनात थे।
बता दें कि मुख्यमंत्री कार्यालय समेत 40 मंत्री-कार्यालयों में मंजूर किए गए 904 अस्थायी पदों में से केवल 549 पद ही मानक प्रक्रियाओं से भरे गए थे, जबकि बाकी पदों पर बिना वेरिफ़ाई किए गए, अनौपचारिक नियुक्तियां की गई थीं। यह कार्रवाई 25 अगस्त 2026 को जनरल एडमिनिस्ट्रेशन डिपार्टमेंट द्वारा जारी एक आदेश के तहत की गई है। इस आदेश में कहा गया था कि बिना उचित मंज़ूरी के नियुक्त किए गए, या जिनके जरूरी बैकग्राउंड चेक या ईमानदारी की जांच नहीं हुई है, वे सभी अधिकारी 10 सितंबर तक अपने मूल विभागों में लौट जाएं, वरना उनकी सैलरी रोक दी जाएगी।
यह कदम महाराष्ट्र गवर्नमेंट रूल्स ऑफ बिजनेस 2026 में हाल ही में हुए प्रशासनिक बदलावों के अनुरूप है। इन नियमों के तहत मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को व्यक्तिगत कैबिनेट मंत्रियों के फैसलों पर व्यापक वीटो अधिकार दिए गए हैं। नई व्यवस्था के तहत, भविष्य में कर्मचारियों की किसी भी नियुक्ति के लिए मुख्यमंत्री कार्यालय से कड़ी जांच और अंतिम मंज़ूरी की ज़रूरत होगी। यह सख्त कार्रवाई सभी मंत्रालयों के कामकाज पर मुख्यमंत्री का सीधा अधिकार मज़बूत करती है और राज्य के विभागों में लंबे समय से चली आ रही अनौपचारिक भर्ती प्रथाओं को खत्म करती है।