भुवनेश्वर, एक अप्रैल (भाषा) ओडिशा सरकार ने मंगलवार रात को विधायकों, मंत्रियों, मुख्यमंत्री और अन्य लोगों के वेतन, भत्ते और पेंशन में तीन गुना वृद्धि से संबंधित चार विधेयकों को वापस ले लिया। यह कदम विधानसभा अध्यक्ष सुरमा पाधी द्वारा बजट सत्र को निर्धारित समय से पांच दिन पहले अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किए जाने से ठीक पहले उठाया गया है।
सदन ने चार घंटे तक विस्तृत चर्चा करके मध्यरात्रि के बाद ओडिशा राज्य सार्वजनिक विश्वविद्यालय (शिक्षक काडर में आरक्षण) विधेयक, 2026 को भी पारित कर दिया। इस चर्चा में सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों सदस्यों ने भाग लिया।
कांग्रेस सदस्य अशोक दास के साथ बीजू जनता दल (बीजद) के विधायकों रणेंद्र प्रताप स्वैन, अरुण कुमार साहू, ध्रुव चरण साहू और गणेश्वर बेहरा ने विधेयक को चयन समिति को भेजने की मांग की, वहीं उच्च शिक्षा मंत्री सूर्यवंशी सूरज ने इसके तत्काल कार्यान्वयन के पक्ष में तर्क दिए।
विधानसभा का यह सत्र 17 फरवरी को शुरू हुआ था और आठ अप्रैल तक चलने वाला था। हालांकि, सदन ने सरकार के मुख्य सचेतक सरोज कुमार प्रधान के सत्र को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी क्योंकि ज्यादा काम लंबित नहीं था।
सांध्य सत्र के दौरान सदन ने ओडिशा विनियोग विधेयक 2026 पारित किया जिससे राज्य सरकार को वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान अपनी समेकित निधि से 3.10 लाख करोड़ रुपये खर्च करने की अनुमति मिल गई।
सत्र के अनिश्चितकाल के लिए समापन से पहले ओडिशा के संसदीय कार्य मंत्री मुकेश महालिंग ने चार संशोधन विधेयकों को वापस लेने के लिए नोटिस पेश किया जिनमें विधायकों, अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और मंत्रियों के वेतन, भत्ते और पेंशन में संशोधन का प्रस्ताव था।
सदन की सहमति से विधेयक वापस ले लिए गए जिन्हें इससे पहले नौ दिसंबर, 2025 को शीतकालीन सत्र के अंतिम दिन सदन में सर्वसम्मति से पारित किया गया था।
भाषा सुरभि शोभना
शोभना