ओडिशा : जनजातीय आबादी वाले नौ जिलों में विशेष विकास परिषदों का पुनर्गठन

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ओडिशा : जनजातीय आबादी वाले नौ जिलों में विशेष विकास परिषदों का पुनर्गठन

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  • Publish Date - September 28, 2022 / 04:25 PM IST,
    Updated On - November 29, 2022 / 08:16 PM IST

भुवनेश्वर, 28 सितंबर (भाषा) ओडिशा सरकार ने जनजातीय समूहों की 50 प्रतिशत आबादी वाले नौ जिलों में विशेष विकास परिषदों (एसडीसी) का पुनर्गठन किया है।

मुख्यमंत्री नवीन पटनायक द्वारा सोमवार को ओडिशा में ‘जनजातियों पर विश्वकोश’ जारी करने के एक दिन बाद यह निर्णय लिया गया है।

विश्वकोश में प्रदेश में रहने वाले सभी 62 जनजातीय समूहों की परंपराओं और संस्कृतियों को शामिल किया गया है।

राज्य सरकार द्वारा जारी एक अधिसूचना के मुताबिक, मयूरभंज, मलकानगिरी, क्योंझर, कोरापुट, नबरंगपुर, रायगडा, गजपति, कंधमाल और सुंदरगढ़ जिले में विशेष विकास परिषदों का पुनर्गठन किया गया है।

विपक्षी दलों ने दावा किया कि राज्य में सत्तारूढ़ बीजू जनता दल (बीजद) 2024 के विधानसभा चुनाव के मद्देनजर इस तरह की पहल के जरिये जनजातीय समूहों को लुभाने की कोशिश कर रही है।

विशेष विकास परिषदों के गठन का उद्देश्य जनजातीय संस्कृति का संरक्षण करना, स्वदेशी ज्ञान को मान्यता दिलाना और जनजातीय परंपराओं व प्रथाओं का दस्तावेजीकरण करना है।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की ओडिशा इकाई के उपाध्यक्ष भृगु बक्सीपात्रा ने आरोप लगाया, “राज्य सरकार बीजद नेताओं की मदद करने और लोगों को लुभाने के मकसद से इस तरह की पहल कर रही है”।

पिछले सप्ताह आदिवासी मामलों के केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा को लिखे पत्र में पटनायक ने ओडिशा के 160 जनजातीय समुदायों को राज्य की अनुसूचित जनजाति (एसटी) सूची में शामिल करने की मांग की थी।

ओडिशा के मंत्री और बीजद नेता जगन्नाथ सरका ने कहा, “मुख्यमंत्री जनजातीय समूहों के विकास में रुचि रखते हैं। उन्होंने पहले भी कई पहल की थीं और भविष्य में भी करेंगे।”

2017 में मुख्यमंत्री नवीन पटनायक द्वारा गठित विशेष विकास परिषद 2020 और 2021 में कथित तौर पर निष्क्रिय थे, क्योंकि उनमें अध्यक्ष और उपाध्यक्ष की नियुक्ति नहीं की गई थी।

भाषा

फाल्गुनी पारुल

पारुल